मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को थामने के लिए अब कूटनीतिक प्रयास तेज़ हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की एक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा किए जाने के बाद, पाकिस्तान के इस युद्ध में मध्यस्थ (Mediator) बनने की अटकलें तेज़ हो गई हैं।
शहबाज़ शरीफ़ का बड़ा ऑफर प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट घोषणा की है कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सार्थक और निर्णायक बातचीत की मेज़बानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के लिए सम्मान की बात बताते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए इस्लामाबाद हर संभव योगदान देने को प्रतिबद्ध है।
पाकिस्तान ही क्यों? कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान एक तटस्थ मंच के रूप में उभर सकता है। वाशिंगटन और तेहरान, दोनों के साथ पाकिस्तान के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे समय में जब सीधी बातचीत के रास्ते बंद हो चुके हैं, पाकिस्तान की बैक-चैनल मध्यस्थता इस युद्ध को थामने का एक जरिया बन सकती है।
ईरान का रुख और ट्रंप का दावा हालाँकि, यह राह आसान नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि उन्होंने ईरान के साथ सार्थक बातचीत के जरिए पांच दिनों तक युद्ध विराम करवाया है। लेकिन तेहरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी औपचारिक बातचीत के लिए अभी तैयार नहीं हैं और उनकी शर्तें—प्रतिबंधों से राहत और अमेरिकी हस्तक्षेप की गारंटी—पूरी होनी चाहिए।
पर्दे के पीछे की हलचल विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश चुपचाप पर्दे के पीछे काम कर रहे हैं। चर्चा है कि बातचीत के लिए इस्लामाबाद एक संभावित केंद्र हो सकता है। रिपोर्ट्स में यह भी संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में अमेरिकी दूत और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच उच्च-स्तरीय मुलाकातों का खाका तैयार किया जा रहा है।
खुद पाकिस्तान के सामने चुनौतियां दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान खुद अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ गंभीर संघर्ष में उलझा हुआ है। फरवरी में हुए हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर कम है, क्योंकि दुनिया की नज़रें फ़िलहाल होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते हो रही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर टिकी हैं, जो इस युद्ध के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है।
निष्कर्ष ईरान भले ही अभी आधिकारिक बातचीत से इनकार कर रहा हो, लेकिन उसके विदेश मंत्रालय ने यह स्वीकार किया है कि मित्र देशों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। स्पष्ट है कि पर्दे के पीछे खेल शुरू हो चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान वाकई अमेरिका और ईरान के बीच की खाई को पाटने वाला सरपंच बन पाएगा या यह कूटनीतिक कवायद सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी।
Donald J. Trump Truth Social Post 10:46 AM EST 03.24.26 pic.twitter.com/UNLDseZir6
— Commentary Donald J. Trump Posts From Truth Social (@TrumpDailyPosts) March 24, 2026
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