अमेरिका-ईरान युद्ध में नया मोड़: क्या पाकिस्तान और ये देश करवा रहे हैं सुलह?
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष ने चौथे हफ्ते में एक चौंकाने वाला रुख अख्तियार कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले आगामी हवाई हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस शांति पहल के पीछे पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है।

मध्यस्थता की पर्दे के पीछे की कहानी रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो दिनों से पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्री अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के सीडीएफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति ट्रंप से सीधी बातचीत की है। माना जा रहा है कि इस हफ्ते इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हो सकती है।

ट्रंप का 5 दिन का अल्टीमेटम राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि अगर 5 दिनों के भीतर ईरान के साथ शांति समझौता नहीं हुआ, तो वे फिर से बमबारी शुरू कर देंगे। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी ईरान के एक अत्यंत सम्मानित व्यक्ति से बातचीत हुई है और वे परमाणु हथियारों को लेकर एक डील के करीब हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे अमेरिका की समय काटने की चाल बताया है।

आर्थिक मोर्चे पर राहत के संकेत ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है। शेयर बाजारों में तेजी देखी गई है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 13% गिरकर लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उपजे ऊर्जा संकट के बीच यह गिरावट दुनिया के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

ईरान का रुख: सुलह या रणनीति? तेहरान ने दोटूक कहा है कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका ने की थी, इसलिए वॉशिंगटन को पर्दे के पीछे से नहीं, बल्कि सीधे बातचीत की मेज पर आना होगा। ईरान का कहना है कि वे क्षेत्रीय देशों की शांति पहल का स्वागत करते हैं, लेकिन शांति की शर्तें वॉशिंगटन को ही तय करनी होंगी।

क्या है इस युद्ध की पृष्ठभूमि? 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष सैन्य और धार्मिक नेताओं की जान जा चुकी है। जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों, तेल रिफाइनरियों और गैस टर्मिनलों को निशाना बनाया है। इस जंग की आग अब सऊदी अरब, यूएई और बहरीन तक भी फैल चुकी है।

9 अप्रैल की डेडलाइन अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने के लिए 9 अप्रैल की तारीख तय की है। ट्रंप प्रशासन का मुख्य फोकस ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने और मध्य पूर्व में स्थिरता वापस लाने पर है। आने वाले पांच दिन न केवल अमेरिका और ईरान के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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