पैसा पूरा-डाटा अधूरा! आधी रात को क्यों गायब हो जाता है आपका इंटरनेट?
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डिजिटल युग में इंटरनेट अब रोटी, कपड़ा और मकान की तरह हमारी एक अनिवार्य जरूरत बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस डेटा के लिए आप अपनी मेहनत की कमाई खर्च करते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा हर रात चोरी हो रहा है? राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों के इस अदृश्य खेल को बेनकाब किया है।

रोजाना एक्सपायर हो रहा है आपका डेटा वर्तमान में अधिकांश टेलीकॉम कंपनियां ऐसे प्लान बेचती हैं, जिनमें रोजाना 1.5GB, 2GB या 3GB डेटा की सीमा तय होती है। समस्या यह है कि अगर आप किसी दिन तय सीमा से कम डेटा इस्तेमाल करते हैं, तो बचा हुआ डेटा रात के 12 बजते ही लैप्स (खत्म) हो जाता है।

सांसद राघव चड्ढा ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। उनका तर्क है कि जब उपभोक्ता पूरे महीने के लिए पैसे चुका रहा है, तो उसके डेटा को आधी रात को खत्म करने का अधिकार कंपनियों को किसने दिया?

पेट्रोल का उदाहरण देकर समझाया डिजिटल घोटाला अपनी दलील को मजबूत करते हुए चड्ढा ने एक सटीक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, यदि कोई व्यक्ति पेट्रोल पंप से 20 लीटर पेट्रोल खरीदे और केवल 15 लीटर ही इस्तेमाल करे, तो क्या पंप मालिक बचा हुआ 5 लीटर पेट्रोल वापस छीन लेता है? फिर डेटा के मामले में यह नियम कैसा?

राघव चड्ढा के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर डेली लिमिट वाले प्लान्स को बढ़ावा देती हैं। उन्हें डर है कि अगर ग्राहकों को मासिक कोटा (Monthly Quota) दिया गया, तो लोग अपनी सुविधा अनुसार उसे खर्च करेंगे, जिससे कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है।

आम आदमी की जेब पर सीधा हमला इंटरनेट आज केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है। ऑनलाइन क्लास, वर्क फ्रॉम होम और बैंकिंग जैसे अनिवार्य काम पूरी तरह इसी पर निर्भर हैं। ऐसे में डेटा का बर्बाद होना सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर डाका डालने जैसा है।

सांसद की मांग: डेटा को मिले संपत्ति का दर्जा संसद में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है:

  1. डेटा रोलओवर: आज का बचा हुआ डेटा अगले दिन की सीमा में जोड़ा जाना चाहिए।
  2. मासिक कोटा: महीने के अंत में जो डेटा बच जाए, उसे अगले रिचार्ज या अगले महीने के कोटे में शामिल किया जाना चाहिए।
  3. डिजिटल संपत्ति: डेटा को एक डिजिटल संपत्ति माना जाए। जिस तरह हम पैसे ट्रांसफर करते हैं, उपभोक्ताओं को अपना बचा हुआ डेटा दूसरों को भेजने (Transfer) की अनुमति मिलनी चाहिए।

क्या अब भी करोड़ों भारतीय बिना किसी सवाल के अपनी डिजिटल संपत्ति को हर रात बर्बाद होते देखते रहेंगे? इस मुद्दे ने टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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