पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के गिलगित में इस वक्त स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के एक विवादित बयान ने पूरे देश में शिया और सुन्नी समुदायों के बीच एक नई तनातनी पैदा कर दी है। सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सीधे तौर पर सेना प्रमुख के खिलाफ है।
क्या है आर्मी चीफ का विवादित बयान? पूरे विवाद की शुरुआत रावलपिंडी में आयोजित एक इफ्तार पार्टी के दौरान हुई। कथित तौर पर शिया धर्मगुरुओं से बातचीत के दौरान जनरल आसिम मुनीर ने तल्ख लहजे में कहा, जिन्हें ईरान से इतना ही प्यार है, वे वहीं चले जाएं। मुनीर की यह टिप्पणी शिया समुदाय के लिए अपमानजनक साबित हुई और देखते ही देखते पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध की आग भड़क उठी।
सेना की वफादारी इजरायल के साथ गिलगित में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे धर्मगुरुओं ने जनरल मुनीर को सीधे चुनौती दी है। एक मौलाना ने गरजते हुए कहा, आसिम मुनीर, अगर तुम खुलेआम इजरायल का पक्ष लेते हो, तो अब हम भी डंके की चोट पर ईरान के साथ खड़े होंगे। अब यह देखा जाएगा कि कौन किसे सरहद के पार भेजता है—तुम हमें ईरान भेजोगे या हम तुम्हें इजरायल? प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना अमेरिका और इजरायल के इशारों पर काम कर रही है।
हिंसा और विरोध की जड़ें यह पूरा विवाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद उपजे घटनाक्रम से जुड़ा है। कराची में अमेरिकी दूतावास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बाद जनरल मुनीर ने कड़ी चेतावनी दी थी कि बाहरी देशों के मुद्दों पर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिया समुदाय का मानना है कि मुनीर की यह चेतावनी सिर्फ उनके समुदाय को निशाना बनाने और उन्हें दोषी ठहराने के लिए दी गई थी।
सेना के खिलाफ बढ़ता असंतोष गिलगित-बाल्टिस्तान में हो रहा यह प्रदर्शन केवल एक धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सेना के प्रति जनता के गहरे गुस्से का प्रतिबिंब है। दशकों से चले आ रहे खिलाफत और इमामत के वैचारिक मतभेदों के बीच, सेना का यह दखल अब आग में घी का काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गिलगित में जनता का सेना के खिलाफ सड़क पर उतरना यह दर्शाता है कि पाकिस्तानी हुकूमत और सेना की पकड़ कमजोर हो रही है। अब स्थिति उस मोड़ पर है जहां स्थानीय आबादी सीधे तौर पर सेना के शीर्ष नेतृत्व को ललकारने से पीछे नहीं हट रही है।
Protest in Gilgit against Asim Munir’s misconduct toward Shia scholars:
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) March 22, 2026
“Asim Munir, if you openly stand in support of Israel, then we will also openly stand in support of Iran.
Let’s see whether you send us to Iran or we send you to Israel.” pic.twitter.com/yHbU0CaaeT
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