ट्रंप का यू-टर्न: ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमले टाले, शांति वार्ता का दावा
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ पिछले दो दिनों में सकारात्मक बातचीत हुई है और वह ईरान के बिजली संयंत्रों व ऊर्जा ढांचे पर होने वाले सैन्य हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल रहे हैं।

ट्रंप का सुलहपूर्ण रुख

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर साझा की गई अपनी पोस्ट में कहा कि बातचीत का माहौल रचनात्मक है। उन्होंने वॉर डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि अगले पांच दिनों तक ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर कोई हमला न किया जाए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राहत बैठकों की सफलता पर ही निर्भर करेगी।

ईरान का इनकार

इस दावे के ठीक उलट, ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी फार्स ने एक अज्ञात स्रोत के हवाले से कहा है कि ट्रंप के साथ कोई भी सीधा या अप्रत्यक्ष संपर्क नहीं हुआ है। ईरान का दावा है कि ट्रंप ने यह कदम तब उठाया जब उन्हें पता चला कि ईरान के निशाने पर पश्चिम एशिया के सभी पावर स्टेशन हो सकते हैं।

बाजारों में राहत, तेल की कीमतों में गिरावट

ट्रंप के इस बयान का असर वैश्विक बाजारों पर तुरंत दिखा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 13% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। गैस की कीमतों में भी नरमी देखी गई है, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली है।

अभी भी कई सवाल अनसुलझे

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख उनके पिछले आक्रामक बयानों से बिल्कुल अलग है। अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि वार्ता का मुख्य एजेंडा क्या है—क्या यह युद्धविराम है, या ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल गतिविधियों से जुड़ा कोई मुद्दा? ईरान की ओर से वार्ता की पुष्टि न होना भी इस स्थिति को संशय में डाल रहा है।

48 घंटे की डेडलाइन और तनाव की पृष्ठभूमि

इससे पहले, ट्रंप ने ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने के लिए 48 घंटे की कड़ी डेडलाइन दी थी। धमकी दी गई थी कि यदि रास्ता नहीं खोला गया, तो ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट को तबाह कर दिया जाएगा।

यह तनाव तब और बढ़ गया था जब ईरान की दो मिसाइलों ने इसराइल के परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया था, जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके जवाब में ईरान का कहना है कि वह केवल आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहा है और होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, बल्कि केवल हमलावर देशों के जहाजों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले पांच दिनों में ये वार्ताएं किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेंगी या तनाव फिर से चरम पर होगा।

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