4 साल सत्ता में मौज, अब चुनावी मंच पर आंसू : संजय निषाद के इमोशनल ड्रामा पर घिरे राजनीति के गलियारे
News Image

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा चढ़ने लगा है। योगी सरकार में मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने अब अपनी ही सरकार के खिलाफ तेवर सख्त करते हुए चुनावी बिगुल फूंक दिया है। हालांकि, उनकी हालिया जनसभा में रोने की घटना ने विपक्ष के साथ-साथ जनता के बीच भी तीखी बहस छेड़ दी है।

मंच पर छलके आंसू, विपक्ष ने बताया नाटक गोरखपुर की जनसभा में संजय निषाद निषाद समाज की दुर्दशा का जिक्र करते हुए फफक कर रो पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है और निषाद समाज का हक छीना जा रहा है। उनके इन आंसुओं ने जहां समर्थकों में जोश भरने की कोशिश की, वहीं समाजवादी पार्टी ने इसे चुनावी ड्रामा करार दिया है। विपक्ष का तर्क है कि 4 साल तक सत्ता का सुख भोगने के बाद चुनाव करीब आते ही उन्हें समाज की याद आना महज एक ढकोसला है।

क्या है संजय निषाद की प्रमुख मांगें? संजय निषाद नदियों के किनारे रहने वाली 21 उपजातियों के लिए अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे की मांग पर अड़े हैं। उनका दावा है कि ये जातियां लंबे समय से ओबीसी में रहकर अपना हक खो रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने मछली पकड़ने और बालू खनन के पारंपरिक अधिकारों को बहाल करने की भी मांग की है। निषाद ने मंच से ऐलान किया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

सत्ता और संगठन के बीच फंसी निषाद पार्टी निषाद पार्टी वर्तमान में भाजपा के साथ एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। वर्ष 2022 के चुनाव में पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं, लेकिन वादे पूरे न होने से कार्यकर्ताओं में असंतोष है। एक तरफ सपा से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा के साथ गठबंधन में भी असहजता साफ दिख रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर वे सरकार का हिस्सा हैं, तो समाधान निकालने के बजाय सड़क पर रोने की नौबत क्यों आई?

चुनावी मिशन: प्रयागराज से मेरठ तक हल्ला बोल संजय निषाद अब अपनी खोई सियासी जमीन बचाने के लिए आक्रामक मोड में हैं। उन्होंने प्रयागराज, वाराणसी और मेरठ में बड़ी रैलियों का ऐलान किया है। उनका पूरा जोर इस बात पर है कि सपा और बसपा ने निषाद समाज को केवल ठगा है। बहरहाल, 2027 के चुनाव से पहले यह आंसू वाली सियासत निषाद समाज का वोट दिलाएगी या उन्हें और अधिक सवालों के घेरे में खड़ा करेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

IPL 2026 से पहले चेन्नई का महा-मिलन : धोनी की मौजूदगी में मैदान पर लौटे पुराने दिग्गज, गूंजा ROAR 2026

Story 1

बिना टिकट स्टेडियम वाला रोमांच: IPL 2026 के लिए BCCI ने जारी की 15 शहरों की लिस्ट, देखें आपके शहर का नाम

Story 1

ये तो बस शुरुआत है : ईरान ने दिखाई ड्रोन और मिसाइल की ताकत, अमेरिका को दी सख्त चेतावनी

Story 1

बिहार बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 आज: ऐसे डाउनलोड करें अपना स्कोरकार्ड, जानें पूरा तरीका

Story 1

क्या लंबा खिंचेगा अमेरिका-ईरान युद्ध? वित्त मंत्री बोले- पैसे की कोई कमी नहीं

Story 1

बंगाल में ममता की घेराबंदी: ओवैसी ने किया गठबंधन का ऐलान, मुस्लिम वोट बैंक पर सीधी नजर

Story 1

मंच पर फूट-फूटकर रोए संजय निषाद: क्या BJP से टूट रहा है साथ? सामने आया बड़ा सच

Story 1

धुरंधर 2 का खौफ: कराची की गलियों में भारतीय जासूसों की तलाश, पुलिस ने भिखारियों और संदिग्धों को घेरा

Story 1

सैमसंग गैलेक्सी S26 सीरीज में अब एप्पल जैसा एयरड्रॉप , फाइल शेयरिंग हुई बेहद आसान

Story 1

पैसों की फिक्र छोड़ो, जंग जारी रहेगी : ट्रंप प्रशासन का सीधा संदेश, ईरान को चेतावनी