वॉशिंगटन: 28 फरवरी से शुरू हुआ अमेरिका और ईरान के बीच का संघर्ष अब अपने पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। युद्ध का मैदान केवल सैन्य शक्ति की अग्निपरीक्षा नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती दो हफ्तों में ही अमेरिका को करीब 7500 करोड़ डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
वित्त मंत्री ने किया बचाव अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन इस सैन्य अभियान को जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। एक टीवी साक्षात्कार के दौरान, टैक्स बढ़ाए जाने की संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए बेसेंट ने कहा, हमारे पास इस युद्ध के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। अतिरिक्त फंड की मांग केवल एक सुरक्षा उपाय है, न कि कोई तत्काल मजबूरी।
200 बिलियन डॉलर की नई मांग बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेंटागन के लिए लगभग 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त फंड की मांग की है। ट्रंप ने इसे देश की सैन्य श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए एक छोटी कीमत करार दिया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार, यह पैसा तेहरान के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी है।
आर्थिक मोर्चे पर दबाव युद्ध की लागत के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव चिंताजनक होते जा रहे हैं। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित करने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ऊर्जा बाजार में आई इस अस्थिरता ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को चरमरा दिया है, जिसका सीधा असर अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भी पड़ रहा है।
कांग्रेस में विरोध के सुर प्रशासन द्वारा मांगे गए 200 बिलियन डॉलर के इस भारी-भरकम पैकेज को अमेरिकी कांग्रेस में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के सांसद इस खर्च की पारदर्शिता और दीर्घकालिक आर्थिक परिणामों को लेकर आशंकित हैं। जानकारों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो प्रशासन के लिए बिना कर बढ़ाए या कर्ज लिए इस वित्तीय बोझ को उठाना मुश्किल हो सकता है।
युद्ध की पृष्ठभूमि यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुआ था। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस संघर्ष में अब तक अमेरिका के 13 सैनिकों की जान जा चुकी है और कई महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण नष्ट हो गए हैं। फिलहाल, ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि उन्होंने सभी विकल्प खुले रखे हैं और वे सेना को किसी भी संसाधन की कमी नहीं होने देंगे।
WELKER: Would the administration ever raise taxes in order to fund this war?
— Aaron Rupar (@atrupar) March 22, 2026
BESSENT: Again, Kristen, terrible framing
WELKER: It s a simple question
BESSENT: It s a ridiculous question
WELKER: Can you answer it?
BESSENT: Why would we do that? We have plenty. We have a… pic.twitter.com/cOZpvf59Zf
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