बंगाल में ममता की घेराबंदी: ओवैसी ने किया गठबंधन का ऐलान, मुस्लिम वोट बैंक पर सीधी नजर
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अब एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ओवैसी ने रविवार को हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के साथ चुनावी गठबंधन का बड़ा ऐलान कर दिया।

ममता पर ओवैसी का तीखा प्रहार हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगाल में मुस्लिम आबादी 30 फीसदी है, लेकिन धर्मनिरपेक्षता के नाम पर पार्टियां उनका वोट तो लेती हैं, पर उन्हें उनका अधिकार और भागीदारी नहीं देतीं। ओवैसी का कहना है कि वे दबे-कुचले लोगों की आवाज बनकर विधानसभा में पहुंचना चाहते हैं।

भवानीपुर में ममता के खिलाफ मुस्लिम उम्मीदवार इस नए गठबंधन ने ममता बनर्जी की कुर्सी के लिए सीधी चुनौती पेश की है। हुमायूं कबीर ने राज्य की 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। सबसे चौंकाने वाला कदम ममता बनर्जी की सुरक्षित सीट भवानीपुर पर उठाया गया है, जहाँ से गठबंधन ने पूनम बेगम को मैदान में उतारा है। इस सीट पर पहले से ही भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने ममता को चुनौती दे रखी है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

हुमायूं कबीर का बदला और टीएमसी से अनबन हुमायूं कबीर कभी ममता बनर्जी के करीबी थे, लेकिन मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास को लेकर हुए विवाद के बाद टीएमसी ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था। अब कबीर ने अपनी पहली लिस्ट में 15 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है और वे स्वयं अपनी पुरानी सीट के अलावा मुर्शिदाबाद की दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।

मुस्लिम वोट बैंक की सियासी जंग पश्चिम बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो अब तक ममता बनर्जी का पारंपरिक वोट बैंक मानी जाती रही है। ओवैसी की एंट्री से टीएमसी के इस मजबूत किले में बड़ी सेंध लग सकती है। हालांकि, सीट-शेयरिंग के फॉर्मूले पर अभी खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन ओवैसी और कबीर की यह जुगलबंदी ममता के लिए चिंता का सबब बन गई है।

चुनाव की तारीखें और भविष्य राज्य की 294 सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही ओवैसी के इस कदम ने बंगाल के चुनावी माहौल को गर्मा दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ओवैसी का यह गठबंधन ममता के मुस्लिम वोट बैंक को छिटकाता है या टीएमसी किसी तरह इसे मैनेज कर पाती है।

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