क्वाड की हुंकार: चीन की आर्थिक दादागिरी पर सख्त रुख, भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति की तारीफ
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अटलांटा: अमेरिका के अटलांटा में आयोजित क्वाड (QUAD) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत का कद एक बार फिर वैश्विक स्तर पर बढ़ा है। बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने न केवल दुनिया के प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर सहमति जताई, बल्कि चीन की विस्तारवादी और आर्थिक दबाव वाली नीतियों पर भी कड़ा रुख अपनाया।

नेपाल आपदा में भारत की फर्स्ट रिस्पॉन्डर भूमिका की सराहना

क्वाड देशों ने नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान भारत द्वारा निभाई गई भूमिका की जमकर तारीफ की। संयुक्त बयान में माना गया कि भारत ने सबसे पहले मदद पहुँचाकर एक जिम्मेदार पड़ोसी का धर्म निभाया है। भारत ने न केवल आर्थिक सहायता दी, बल्कि राहत और बचाव कार्यों के लिए अत्याधुनिक उपकरण भी मुहैया कराए। इसे आपदा के समय भारत की सक्रिय कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है।

चीन की आर्थिक दादागिरी पर निशाना

बिना किसी देश का नाम लिए, क्वाड ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित करने वाली चीन की नीतियों पर सीधा प्रहार किया। बैठक में कहा गया कि मनमाने ढंग से निर्यात पर पाबंदियां लगाना और महत्वपूर्ण उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर बाजार बिगाड़ना वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है। क्वाड ने स्पष्ट किया कि आर्थिक सुरक्षा के बिना वैश्विक समृद्धि संभव नहीं है।

लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर जोर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए क्वाड ने होर्मुज, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही को अनिवार्य बताया। इन समुद्री मार्गों से ऊर्जा और व्यापार की आपूर्ति होती है, जिस पर किसी भी तरह का टोल या दबाव स्वीकार्य नहीं है। क्वाड ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत नौवहन की आजादी की रक्षा करने का संकल्प लिया।

जयशंकर ने रखा भारत का पक्ष

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्थिरता और सभी देशों को अपने फैसले लेने की आजादी सुनिश्चित करना क्वाड की प्राथमिकता है। उन्होंने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए मजबूत वैश्विक सप्लाई चेन बनाने की वकालत की।

शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरा भारत

बैठक के इतर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र करार दिया और एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। जी-20 से लेकर क्वाड तक, भारत ने नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों और उससे ग्लोबल साउथ देशों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। यह बैठक साबित करती है कि वैश्विक मंच पर भारत की आवाज अब दुनिया के बड़े सुरक्षा फैसलों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।

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