वीवीएस लक्ष्मण: पूर्व राष्ट्रपति के भतीजे, फिर भी नहीं खेल पाए वर्ल्ड कप, 281 रनों से मचाया था कोहराम
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भारतीय क्रिकेट के वेरी वेरी स्पेशल यानी वीवीएस लक्ष्मण आज अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। कलाइयों के जादूगर के रूप में मशहूर लक्ष्मण की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही हैरान करने वाली भी है। एक ऐसा दिग्गज बल्लेबाज, जिसने ऑस्ट्रेलिया के अजय विजय रथ को अकेले दम पर रोका, लेकिन अपने शानदार करियर में एक भी वर्ल्ड कप नहीं खेल सका।

डॉक्टर परिवार का होनहार, जो बना क्रिकेट का सुपरस्टार 1 नवंबर 1974 को हैदराबाद में जन्मे लक्ष्मण का परिवार शैक्षणिक रूप से काफी समृद्ध था। वे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के भतीजे हैं। उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर थे और लक्ष्मण खुद एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। हालांकि, क्रिकेट के जुनून ने उन्हें श्वेत कोट छोड़कर मैदान पर उतरने के लिए मजबूर किया।

281 रनों की वो पारी, जिसे दुनिया कभी नहीं भूलेगी साल 2001 का ईडन गार्डन्स टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे रोमांचक पन्ना है। स्टीव वॉ की अजेय ऑस्ट्रेलियाई टीम के सामने भारत फॉलोऑन खेल रहा था। उस कठिन समय में लक्ष्मण (281) और राहुल द्रविड़ के बीच हुई 376 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी ने न केवल मैच का रुख बदला, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के 16 मैचों के विजय अभियान को भी ब्रेक लगा दिया।

ऑस्ट्रेलिया के लिए काल बने लक्ष्मण लक्ष्मण का बल्ला ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के खिलाफ हमेशा आग उगलता रहा। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के 11,119 रनों में से 3,173 रन केवल कंगारू टीम के खिलाफ ही बनाए। 2000 में सिडनी (167 रन), 2003 में एडिलेड (148 रन) और 2010 में मोहाली की रोमांचक जीत में उनकी नाबाद 73 रनों की पारी उनकी तकनीक और जज्बे की मिसाल है।

वो मलाल जो आज भी है: वर्ल्ड कप का सपना अधूरा इतने शानदार करियर के बावजूद लक्ष्मण के नाम एक बड़ा मलाल जुड़ा हुआ है। सचिन, सौरव, राहुल और सहवाग जैसे दिग्गजों के दौर में टीम इंडिया का हिस्सा रहे लक्ष्मण को कभी भी वनडे विश्व कप खेलने का मौका नहीं मिला। भारत के लिए 86 वनडे खेलने के बाद भी विश्व कप उनकी उपलब्धियों की सूची में नहीं जुड़ सका।

संन्यास के बाद भी कोच बनकर संवार रहे भविष्य अगस्त 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी लक्ष्मण खेल से दूर नहीं हुए। उन्होंने कमेंटेटर और आईपीएल में मेंटॉर की भूमिका बखूबी निभाई। वर्तमान में, वे बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के प्रमुख के रूप में भारतीय क्रिकेट के भविष्य को तैयार कर रहे हैं। पद्मश्री से सम्मानित यह दिग्गज आज भी अपनी सादगी और खेल के प्रति समर्पण के लिए युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

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