इटली में मेलोनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग: क्यों भड़का छात्रों-मजदूरों का गुस्सा?
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इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के लिए घरेलू मोर्चे पर मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। महंगाई, आवासीय संकट और सरकार की सैन्य प्राथमिकताओं को लेकर पूरे देश में जनता का आक्रोश फूट पड़ा है। 30 अक्टूबर को इटली के 40 से ज्यादा शहरों में हजारों छात्र, मजदूर और ट्रेड यूनियन के सदस्य सड़कों पर उतर आए और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

क्यों सुलग रही है इटली की सड़कें? यह आंदोलन केवल आर्थिक परेशानियों तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों—जैसे शिक्षा, आवास और वेतन—को नजरअंदाज कर सैन्य बजट बढ़ाने और युद्धग्रस्त इलाकों में हथियार भेजने को प्राथमिकता दे रही है। ट्रेड यूनियन संगठन USB द्वारा बुलाई गई 24 घंटे की हड़ताल में शिक्षकों, टैक्सी चालकों और किसानों ने भी हिस्सा लेकर इसे देशव्यापी रूप दे दिया।

छात्रों का दर्द: शिक्षा और आवास बना चुनौती आंदोलन में छात्रों की भागीदारी सबसे अधिक रही। रोम जैसे शहरों में एक कमरे का किराया 1200 यूरो तक पहुंच चुका है, जिससे छात्रों का पढ़ाई जारी रखना दूभर हो गया है। छात्रों का कहना है कि सरकार शिक्षा बजट में कटौती कर रही है, जबकि वे सस्ती शिक्षा और बेहतर छात्रावास की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान हमें बम नहीं, ज्यादा घर चाहिए का नारा सरकार की प्राथमिकताओं पर सबसे करारा तंज साबित हुआ।

जेनोआ से ट्यूरिन तक हिंसक झड़पें विरोध का दायरा पूरे देश में फैला है। जेनोआ में करीब 15 हजार लोगों ने बंदरगाहों से हथियारों की खेप भेजने का कड़ा विरोध किया। वहीं, ट्यूरिन और मिलान में हालात हिंसक हो गए। ट्यूरिन में पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा, जबकि कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि व्यापारिक गतिविधियों को युद्ध से जोड़ना पूरी तरह गलत है।

सरकार की सख्ती और राजनीतिक चुनौती हालिया हिंसा और दुकानों में तोड़फोड़ के बाद मेलोनी सरकार ने सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े कानूनों को और सख्त कर दिया है। सरकार ने ट्रक ड्राइवरों और किसानों के लिए 175.2 मिलियन यूरो के राहत पैकेज की घोषणा की है और युवाओं के लिए बोनस का प्रस्ताव भी रखा है। हालांकि, प्रधानमंत्री का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को कोई राहत नहीं मिलेगी।

क्या मेलोनी सरकार के लिए खतरे की घंटी है? मेलोनी सरकार ने राहत पैकेज के जरिए नाराजगी कम करने की कोशिश तो की है, लेकिन प्रदर्शनकारी केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधार चाहते हैं। शिक्षा, रोजगार और आवास के मोर्चे पर ठोस परिणाम न मिलने से यह असंतोष मेलोनी शासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक चेतावनी बन गया है। यदि सरकार ने आम जनता की इन बुनियादी चिंताओं को जल्द नहीं सुलझाया, तो यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप ले सकते हैं।

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