INDIA Bloc की रैली को हरी झंडी, लेकिन मार्च पर सस्पेंस; दिल्ली पुलिस का बड़ा फैसला
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दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) की रैली को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में सभा करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है, लेकिन कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक निकाले जाने वाले प्रस्तावित मार्च पर रोक लगा दी गई है।

मार्च की अनुमति क्यों नहीं? पुलिस के अनुसार, आयोजनकर्ताओं ने रामलीला मैदान के लिए अनुमति मांगी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। हालांकि, कनॉट प्लेस से मिंटो रोड होते हुए रामलीला मैदान तक मार्च निकालने के लिए न तो कोई अनुमति मांगी गई और न ही पुलिस को इसकी आधिकारिक सूचना दी गई। इस तकनीकी कमी के कारण पुलिस ने मार्च को मंजूरी नहीं दी है।

राहुल गांधी का ऐलान और टकराव लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस मार्च का ऐलान किया था। उन्होंने राजनीतिक दलों के अलावा सिविल सोसाइटी, पत्रकारों और आम जनता से 1 नवंबर को दोपहर 12 बजे कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से जुड़ने की अपील की थी। अब पुलिस की इस सख्ती से सवाल उठ रहे हैं कि क्या विपक्षी नेता और समर्थक मार्च निकालेंगे और क्या पुलिस उन्हें रोकेगी?

राहुल के केंद्र पर गंभीर आरोप राहुल गांधी ने दावा किया है कि केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह दूसरे राज्यों से दिल्ली आ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों से आने वाले कार्यकर्ताओं को रास्ते में बाधा पहुंचाई जा रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है।

विपक्ष की मांग और व्यापारियों की चिंता इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने की मांग पर आधारित है। विपक्ष का तर्क है कि चुनावी व्यवस्था में गड़बड़ी हो रही है।

वहीं, दूसरी ओर दिल्ली के व्यापारियों (CTI) ने भी गठबंधन के नेताओं को पत्र लिख रैली की तारीख बदलने की गुहार लगाई है। व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस और दिवाली के सीजन में बड़ी रैली से ट्रैफिक बाधित होगा, जिससे कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा।

अगला कदम क्या? फिलहाल, रामलीला मैदान में सभा की अनुमति है, लेकिन मार्च को लेकर संशय बरकरार है। अब सबकी निगाहें विपक्षी नेताओं पर हैं कि वे पुलिस के रुख के बाद अपनी रणनीति बदलते हैं या फिर मार्च निकालने पर अड़े रहते हैं। पुलिस और विपक्ष के बीच यह रस्साकशी 1 नवंबर को और अधिक स्पष्ट हो जाएगी।

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