1,218 दिन में कैसे रचा गया अखंड भारत ? अमित शाह ने बताई सरदार पटेल की अद्भुत कहानी
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नई दिल्ली: राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के पहले उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित किए। दिल्ली में आयोजित रन फॉर यूनिटी के दौरान शाह ने उन 1,218 दिनों को याद किया, जिनमें सरदार पटेल ने बिखरती रियासतों को जोड़कर आधुनिक भारत की नींव रखी थी।

असंभव को मुमकिन कर दिखाया

अमित शाह ने कहा कि आजादी के समय दुनिया के कई राजनीतिक विश्लेषकों को यकीन था कि भारत अपनी विविधता के कारण बिखर जाएगा। लेकिन सरदार पटेल ने न केवल भौगोलिक बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक चुनौतियों को मात दी। उन्होंने मात्र 1,218 दिनों में उन सैकड़ों रियासतों का एकीकरण किया, जिसे उस दौर में इंपॉसिबल माना जा रहा था।

2029 तक नशा-मुक्त भारत का लक्ष्य

गृह मंत्री ने सरकार के अगले बड़े संकल्प को दोहराते हुए कहा कि देश अब नक्सलवाद के साये से बाहर आ चुका है। अब अगला लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक भारत को पूरी तरह नशा-मुक्त बनाना है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के सपने को पूरा करने की पहली सीढ़ी करार दिया।

अनुच्छेद 370 से लेकर कर प्रणाली तक

शाह ने मोदी सरकार की उपलब्धियों को सरदार पटेल के विजन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना, कश्मीर का पूर्ण विलय, नक्सलवाद का खात्मा और एक राष्ट्र, एक कर (GST) जैसी नीतियां सरदार साहब की सोच के अनुरूप ही आगे बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का सपना भी सरदार पटेल ने ही देखा था।

सरदार को भुलाने की कोशिश की गई

अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कई वर्षों तक सरदार पटेल को वह सम्मान नहीं दिया गया जिसके वे हकदार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने उन्हें इतिहास से मिटाने की कोशिश की। शाह ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर सरदार साहब के कद और उनके योगदान को वैश्विक पहचान दिलाई।

एकता की शपथ

समारोह के अंत में गृह मंत्री ने उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। इसी जज्बे के साथ आज पूरे देश में एकता दौड़ का आयोजन किया गया है।

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