11 साल पुरानी अदावत, एक ही मंच पर सोनिया और स्वामी! क्या खड़गे ने टाल दिया आमना-सामना?
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नई दिल्ली। सियासत के गलियारों में जब धुर विरोधी नेता एक मंच पर आते हैं, तो तस्वीरें खुद एक सियासी कहानी बयां करने लगती हैं। शनिवार को संसद के संविधान सदन में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा ही दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जहां सोनिया गांधी और सुब्रमण्यम स्वामी एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आए।

बॉडी लैंग्वेज में दिखी असहजता, खड़गे बने बफर ? कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी और सुब्रमण्यम स्वामी की मौजूदगी ने सभी का ध्यान खींचा। दोनों नेता एक-दूसरे के काफी करीब थे, तभी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अचानक उनके बीच में आ गए। इस दृश्य का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बॉडी लैंग्वेज से असहजता साफ झलकती है। हालांकि, यह तय नहीं है कि यह महज इत्तेफाक था या खड़गे ने किसी संभावित टकराव को टालने के लिए ढाल बनने का काम किया, लेकिन इस क्षण ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

अदालती जंग का लंबा इतिहास सोनिया गांधी और सुब्रमण्यम स्वामी के बीच की कड़वाहट आज की नहीं, बल्कि एक दशक से भी ज्यादा पुरानी है। इसकी जड़ ‘नेशनल हेराल्ड’ मामला है। स्वामी ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ निजी आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि कांग्रेस ने एजेएल (AJL) की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए यंग इंडियन के माध्यम से गलत तरीके से लेनदेन किया।

कानूनी दांव-पेच और जमानत का सफर यह टकराव केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा। 2014 में दिल्ली की अदालत ने इस शिकायत पर सोनिया और राहुल गांधी को समन जारी किया था, जिसके बाद 2015 में दोनों ने अदालत में पेश होकर जमानत ली थी। हालांकि, 2025 में ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दाखिल शिकायत पर अदालत ने तकनीकी आधार पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन नेशनल हेराल्ड से जुड़ा मूल विवाद आज भी अदालत और सियासी विमर्श का बड़ा हिस्सा बना हुआ है।

राजनीतिक धरातल पर क्या है स्थिति? भले ही ईडी का मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझा रहा हो, लेकिन राजनीतिक मंच पर स्वामी का गांधी परिवार के खिलाफ मुखर होना जारी रहा है। कांग्रेस इस पूरी कवायद को राजनीतिक प्रतिशोध बताती रही है। शनिवार के कार्यक्रम में सत्ता पक्ष के दिग्गजों और विपक्ष के बड़े चेहरों की मौजूदगी राष्ट्र के प्रति एकता का संदेश देने के लिए थी, लेकिन स्वामी और सोनिया गांधी की संभावित तकरार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत अदावतें अक्सर सार्वजनिक मंचों पर भी अपनी परछाई छोड़ ही जाती हैं।

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