राष्ट्रीय एकता दिवस: लौह पुरुष सरदार पटेल को देश का नमन, PM मोदी ने केवड़िया में दी पुष्पांजलि
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देश आज राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। यह दिन भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती का प्रतीक है। इस अवसर पर राष्ट्र ने अपने लौह पुरुष को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

PM मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर किया नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर सरदार पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने पटेल को अखंड भारत का शिल्पकार बताते हुए कहा कि उनका जीवन एक मजबूत, समृद्ध और सक्षम भारत के निर्माण के लिए समर्पित था। PM ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मातृभूमि की सेवा में दिया गया उनका त्याग, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।

अमित शाह: सरदार पटेल ने देश का भूगोल बदला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने न केवल देश का इतिहास बदला, बल्कि उसके भूगोल को भी आकार दिया। शाह ने कहा, सरदार साहब ने सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर भारत का भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक एकीकरण किया। आज हम जिस अखंड भारत को देखते हैं, वह उन्हीं की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के सरदार पटेल चौक पर महान विभूति को पुष्पांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति ने पटेल के जीवन को राष्ट्रीय एकता की ताकत और अटूट संकल्प की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि पटेल की विरासत आज भी भारत की एकता और प्रगति की राह का मार्गदर्शन कर रही है।

कौन थे लौह पुरुष सरदार पटेल?

31 अक्टूबर 1875 को जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल पेशे से एक प्रखर वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे। आजादी के बाद गृह मंत्री के रूप में उन्होंने अपनी अद्भुत कूटनीति से बिखरी हुई रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने का कठिन कार्य पूरा किया। देश की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने के उनके इसी ऐतिहासिक योगदान के कारण उन्हें लौह पुरुष और एकता का शिल्पकार कहा जाता है।

देशभर में कार्यक्रमों की धूम

राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में विशेष रूप से राष्ट्रीय एकता की शपथ ली जा रही है। यह दिन देश की अखंडता के प्रति संकल्प दोहराने का अवसर बन गया है।

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