विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय अमेरिका के अटलांटा में हैं, जहां वे जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय बैठक वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी हुई है।
होर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर बैठक का एजेंडा ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है। होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका सीधा असर देश के तेल, एलएनजी और उर्वरक आयात पर पड़ता है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि जटिल वैश्विक मुद्दों का समाधान सैन्य कार्रवाई में नहीं, बल्कि कूटनीति में निहित है।
क्वाड की अहम बैठक अटलांटा में क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्री भी एक मंच पर हैं। इस बैठक में समुद्री सुरक्षा, अत्याधुनिक तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक लचीला बनाने पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अस्थिर वैश्विक परिवेश में अपने संबंधों को अधिक व्यापक बना रहा है।
जर्मनी और कनाडा के साथ कूटनीतिक सुधार जयशंकर की जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ प्रस्तावित बैठक व्यापार और रक्षा सहयोग को नई गति देगी। वहीं, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ होने वाली मुलाकात पर सबकी नजरें हैं। पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण रहे संबंधों को सुधारने के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें व्यापार विस्तार के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में होने वाली संभावित कनाडा यात्रा पर भी चर्चा होगी।
दक्षिण अमेरिका के साथ सहयोग का विस्तार अपनी कूटनीतिक यात्रा के दौरान जयशंकर ब्राजील और अर्जेंटीना के विदेश मंत्रियों से भी मिलेंगे। ब्रिक्स में साझेदार ब्राजील के साथ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में समन्वय बढ़ाया जाएगा। वहीं, अर्जेंटीना के साथ मुलाकात का मुख्य आधार लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और कृषि क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करना है।
भारत की बदलती भूमिका अटलांटा की यह बैठक दर्शाती है कि भारत वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज बनकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यूरोप से लेकर लैटिन अमेरिका तक, जयशंकर की ये बैठकें भारत की उस मल्टी-अलाइनमेंट नीति की पुष्टि करती हैं, जिसका मकसद राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजना है।
Pleased to participate in the 1st Plenary of @g20org Foreign Ministers’ Meeting #Atlanta today. Emphasised that in the face of global challenges, military solutions will not work and diplomacy must be given a chance.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 30, 2026
Also highlighted that:
➡️ Global South is… pic.twitter.com/v63BPELQl9
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