चोरी पकड़ी गई तो किया SIR का ऐलान : खड़गे का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला
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दिल्ली में इंडिया गठबंधन ने एक अनोखा और आक्रामक कदम उठाते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर मॉक पार्लियामेंट (सांकेतिक संसद) का आयोजन किया। पूर्व स्पीकर मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेता एकजुट हुए। इसका मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया को गति देना है।

वोटर लिस्ट में हेरफेर का गंभीर आरोप कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वोट का अधिकार खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की अनुमति के बिना ही फॉर्म-6 में बदलाव किया गया और जानबूझकर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। खड़गे ने तंज कसते हुए कहा, जब इनकी चोरी पकड़ी गई, तभी इन्होंने आनन-फानन में SIR (Systematic Improvement of Representation) लागू करने का ऐलान कर दिया।

CEC हटाने की मांग पर अड़ा विपक्ष विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे CEC के खिलाफ किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्था की गरिमा बचाने के लिए यह जंग लड़ रहे हैं। खड़गे ने मांग की कि 2023 का विवादास्पद कानून तुरंत रद्द हो और CEC को पद से हटाया जाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग अब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर काम कर रहा है।

सरकारें गिराईं, अब वोट चुरा रहे हैं खड़गे ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2014 के बाद से सत्ता हथियाने के लिए राजनीतिक दलों को तोड़ने, सरकारों को गिराने और ED-CBI जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग का दौर चला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वे वोट चोरी के स्तर पर उतर आए हैं। खड़गे ने याद दिलाया कि भारत ने संविधान लागू होने के साथ ही सबको समान मताधिकार दिया था, जिसका इतिहास में भी विरोध हुआ था।

प्रतीकात्मक महाभियोग की तैयारी पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन अब आधिकारिक तौर पर महाभियोग प्रस्ताव लाने की दिशा में बढ़ रहा है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे खुद यह प्रस्ताव पेश करेंगे। विपक्ष का मानना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और यदि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता खत्म होती है, तो यह देश की लोकतांत्रिक नींव को कमजोर कर देगा।

इस आयोजन के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे आगामी चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

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