अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी इन दिनों एक बड़े विवाद का केंद्र बनी हुई है। चीन सीमा के पास प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता वाली सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के विरोध में स्थानीय लोग और सरकार आमने-सामने हैं। इस विरोध को दबाने के लिए प्रशासन ने अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
विवाद की असली जड़: विस्थापन का डर स्थानीय आदि जनजाति के लोगों का आरोप है कि इस बांध के निर्माण से उनके पूर्वजों के गांव हमेशा के लिए जलमग्न हो जाएंगे। आदि बाने केबांग यूथ (ABKU) जैसे संगठनों का कहना है कि यह परियोजना न केवल उनकी खेती की जमीन छीन लेगी, बल्कि सदियों से चली आ रही उनकी जीवनशैली और पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को भी नष्ट कर देगी। हाल ही में हुए एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में चार महिलाएं घायल हो गई थीं, जिसके बाद गिरफ्तारी का दौर शुरू हो गया।
रणनीतिक मोर्चे पर भारत vs चीन भारत सरकार के लिए यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन का जरिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत है। चीन ने सियांग नदी (तिब्बत में यारलुंग जंगबो) के ऊपरी हिस्से में मेडोग हाइड्रोपावर स्टेशन बनाने की घोषणा की है, जो दुनिया का सबसे बड़ा बांध हो सकता है। उप-मुख्यमंत्री चौना मेन का तर्क है कि भारत का बांध चीन द्वारा नदी के बहाव को अचानक बदलने या पानी छोड़ने की स्थिति में एक बफर का काम करेगा, जिससे अरुणाचल और असम के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा कम होगा।
सरकार की सफाई और विरोध की राजनीति अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इसे गलतफहमियों का नतीजा बताया है। उनका कहना है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय निवासियों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग ने इस परियोजना को फौरन रद्द करने की मांग की है।
विपक्ष का समर्थन दिल्ली में कांग्रेस ने इसे युवाओं के उस बड़े आंदोलन से जोड़ा है जो पर्यावरण सुरक्षा के लिए हो रहा है। सोशल मीडिया पर सक्रिय कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा ले रही है।
आगे क्या होगा? एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क है और दूसरी तरफ समुदाय का अस्तित्व। सरकार जहां इसे प्रगति और सुरक्षा का प्रतीक बता रही है, वहीं स्थानीय लोग इसे अपनी जड़ों पर हमला मान रहे हैं। फिलहाल, सियांग घाटी में भारी सुरक्षा तैनाती के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
Gen Z across the country is taking to the streets.
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) October 24, 2026
In Delhi, it is for education. In Arunachal Pradesh, it is to protect the forests, rivers and ecosystems that the Adi people have depended on for centuries.
From Delhi to Arunachal, the response has been the same: repression.… pic.twitter.com/MUmvRwYsm5
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