भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कोट्टारी कनकैया नायडू (सीके नायडू) एक ऐसा नाम है, जिसकी धमक आज भी सुनाई देती है। भारत के पहले टेस्ट कप्तान के रूप में पहचाने जाने वाले नायडू का जीवन न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि उनके खेल के किस्से आज भी क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित कर देते हैं।
36 की उम्र में किया डेब्यू नायडू का क्रिकेट के प्रति जुनून बचपन से ही था, उन्होंने महज सात साल की उम्र में खेलना शुरू कर दिया था। हालांकि, भारत के लिए उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू तब हुआ जब वे 36 साल के थे। 1932 में जब भारतीय टीम अपना पहला टेस्ट मैच खेलने इंग्लैंड गई, तब नायडू न केवल टीम का हिस्सा थे, बल्कि उन्हें देश का पहला टेस्ट कप्तान भी बनाया गया।
दर्द सहकर खेली यादगार पारी लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए उस ऐतिहासिक टेस्ट में नायडू ने साहस की मिसाल पेश की। फील्डिंग के दौरान उनके हाथ में गंभीर चोट लग गई थी, फिर भी वे दर्द को नजरअंदाज कर बल्लेबाजी करने उतरे। उस मैच में वे भारत के लिए सबसे अधिक 40 रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।
जब नदी के दूसरे पार गिरी गेंद नायडू की बल्लेबाजी की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके लंबे छक्के विपक्षी टीमों के लिए खौफ का सबब होते थे। 1932 के इंग्लैंड दौरे पर वारविकशर के खिलाफ उन्होंने ऐसी पारी खेली कि स्टेडियम की सीमा पार करते हुए गेंद नदी के दूसरी ओर जा गिरी। उस नदी को तब दो जिलों की सीमा माना जाता था।
एमसीसी के खिलाफ तांडव उनकी आक्रामक शैली का एक और उदाहरण 1926-27 में देखने को मिला, जब उन्होंने मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के खिलाफ केवल 116 मिनट में 153 रन ठोक दिए थे। इस पारी में 11 छक्के शामिल थे, जिनमें से एक शॉट बॉम्बे जिमखाना की छत पर जाकर गिरा था। उनके इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर एमसीसी ने उन्हें चांदी का बल्ला भेंट किया था।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट के बेताज बादशाह भले ही टेस्ट क्रिकेट में उन्हें कम मौके मिले, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड असाधारण रहा। उन्होंने 207 मैचों में 35.94 की औसत से 11,825 रन बनाए, जिसमें 26 शतक शामिल थे। साथ ही, अपनी ऑफ-ब्रेक गेंदबाजी से उन्होंने 411 विकेट भी चटकाए।
सम्मान और विरासत क्रिकेट में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1956 में पद्म भूषण से नवाजा। वे विज्ञापनों में दिखने वाले भारत के शुरुआती क्रिकेटरों में से भी एक थे। आज बीसीसीआई द्वारा दिया जाने वाला सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भारतीय क्रिकेट में उनके अमर योगदान का प्रमाण है। 14 नवंबर 1967 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी का जादू आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में जिंदा है।
Remembering Colonel CK Nayudu - India s first Test captain - on his birth anniversary 🙏 pic.twitter.com/QMiPw2rEwy
— BCCI (@BCCI) October 31, 2023
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