पोलैंड में संवैधानिक संकट: शीर्ष अदालत पर कब्जे के बाद राष्ट्रपति ने बीच हवा से मोड़ा विमान
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पोलैंड इस समय गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। देश की संवैधानिक अदालत के प्रमुख को पद से हटाए जाने के बाद उपजे विवाद ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। इस घटनाक्रम के कारण राष्ट्रपति कारोल नवरोत्स्की को अपनी सेनेगल यात्रा बीच में ही रद्द कर वापस लौटना पड़ा।

बीच हवा से लौटा विमान राष्ट्रपति नवरोत्स्की सेनेगल की आधिकारिक यात्रा पर थे, लेकिन देश के हालात को देखते हुए उन्होंने विमान वापस मोड़ने का फैसला किया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर स्पष्ट किया कि देश के भीतर जारी संवैधानिक उठापटक के समय उनका वहां मौजूद रहना अनिवार्य है।

अदालत में पुलिस का पहरा विवाद की शुरुआत तब हुई जब संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष को उनके पद से हटा दिया गया। इसके तुरंत बाद पुलिस ने अदालत की इमारत को अपने घेरे में ले लिया और सुरक्षा व्यवस्था अपने हाथों में ले ली। इस कार्रवाई से नाराज समर्थकों और विपक्षी दलों ने अदालत के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और पुलिस के साथ उनकी झड़प की खबरें भी सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार ने लोकतांत्रिक मानदंडों को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की है।

सरकार बनाम न्यायपालिका का पुराना द्वंद्व यह घटना पोलैंड में लंबे समय से चल रहे वैचारिक संघर्ष का नतीजा है। एक तरफ प्रधानमंत्री टस्क की यूरोप-समर्थक सरकार है, तो दूसरी तरफ लॉ एंड जस्टिस (PiS) पार्टी है, जिसका शासन 2015 से 2023 तक रहा था।

टस्क सरकार का दावा है कि पिछली सरकार ने न्यायपालिका पर अवैध रूप से राजनीतिक नियंत्रण कर लिया था, जिसे वे अब सुधार रहे हैं। वहीं, PiS के सहयोगियों का आरोप है कि टस्क सरकार न्यायपालिका पर जबरन कब्जा जमा रही है।

तख्तापलट और वैश्विक चिंता विपक्ष ने इस घटना को एक प्रकार का तख्तापलट करार दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री मातेउश मोराविएत्स्की ने चेतावनी दी है कि बिना संवैधानिक प्रक्रिया के यह बदलाव देश में अस्थिरता पैदा करेगा। पूर्व कानून मंत्री ने जनता से इस कदम के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील की है।

इस पूरे मामले पर अमेरिका ने भी अपनी चिंता जताई है। अमेरिकी राजदूत टॉम रोज ने कहा कि पोलैंड में हो रही घटनाएं अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक स्थिरता पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका पोलैंड के हालात पर करीब से नजर रखे हुए है, हालांकि वह देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

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