नासिक में सिंहस्थ कुंभ 2026-28 का आगाज: राष्ट्रपति मुर्मू ने किया धर्मध्वजारोहण
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नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के पावन तट पर आध्यात्मिक महाकुंभ सिंहस्थ कुंभ 2026-2028 का भव्य शुभारंभ हो गया है। शनिवार, 31 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोपहर 12 बजकर 2 मिनट के शुभ मुहूर्त पर पंचवटी स्थित ऐतिहासिक रामकुंड में विधि-विधान से धर्मध्वजा फहराई।

अध्यात्म और परंपरा का संगम वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव के जयकारों के बीच यह ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। ध्वजारोहण के साथ ही लगभग 21 महीने लंबी धार्मिक अवधि का औपचारिक आगाज हो गया है। इस दौरान महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। वहीं, त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुशावर्त तीर्थ पर धर्मध्वज फहराया।

रामकुंड का पौराणिक महत्व नासिक का रामकुंड अपनी पौराणिक मान्यताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान यहीं निवास किया था और उनके चरणों के स्पर्श से यह भूमि पवित्र हुई। कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु गोदावरी के इस पवित्र जल में स्नान कर स्वयं को धन्य मानते हैं। त्र्यंबकेश्वर का ज्योतिर्लिंग मंदिर भी इस आयोजन का दूसरा मुख्य केंद्र है।

12 करोड़ श्रद्धालुओं की तैयारी प्रशासन का अनुमान है कि इस सिंहस्थ कुंभ में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु शामिल होंगे। इस विशाल जनसमूह को संभालने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 22,425 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसमें बेहतर सड़क संपर्क, जलापूर्ति, सीवेज व्यवस्था और नदी तटों का सौंदर्यीकरण शामिल है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण का गठन किया गया है ताकि व्यवस्था सुचारू रहे।

अमृत स्नान और प्रमुख आकर्षण कुंभ का सबसे महत्वपूर्ण चरण अगस्त 2027 में शुरू होगा, जब पहला अमृत स्नान होगा। अखाड़ों के साधु-संतों की भव्य पेशवाई, प्रवचन, भजन-कीर्तन और गोदावरी आरती इस आयोजन के मुख्य आकर्षण होंगे। शैव और वैष्णव अखाड़ों के लिए स्नान की अलग-अलग व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

2028 में होगा समापन यह आध्यात्मिक यात्रा 24 जुलाई 2028 को ध्वज अवतरण के साथ संपन्न होगी। 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाला यह पर्व न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का साक्षात प्रदर्शन भी है। राष्ट्रपति के कर-कमलों से शुरू हुआ यह आयोजन अब आने वाले वर्षों में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य बिंदु बना रहेगा।

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