मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग: अजीत डोभाल और ईरान के सुरक्षा प्रमुख के बीच हाई-लेवल बातचीत, क्या हैं मायने?
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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच भारत की सक्रियता बढ़ गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने सोमवार को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई के साथ फोन पर अहम बातचीत की। इस चर्चा ने रणनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

चर्चा का मुख्य केंद्र ईरानी दूतावास के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत का मुख्य उद्देश्य आपसी लाभ के मुद्दों और पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालातों पर साझा रुख अपनाना था। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस बातचीत पर कोई आधिकारिक विवरण नहीं दिया गया है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता यह बातचीत हाल के उन हमलों के बाद हुई है जिसमें भारतीय नागरिक सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। हाल ही में रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों के हमले में एक भारतीय की मौत हो गई थी और 10 घायल हुए थे। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट के पास भारतीय चालक दल वाले दो व्यापारी जहाजों पर हुए ड्रोन हमलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है।

समुद्री सुरक्षा और कूटनीति की चुनौती होर्मुज के पास हुए हमलों में भारतीय नाविक लापता हुए हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक 18 भारतीयों की जान जा चुकी है, जिनमें से 11 नाविक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात कर समुद्री मार्गों की सुरक्षा और विवादों को बातचीत से सुलझाने का आग्रह किया था।

भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन भारत इस समय एक कठिन कूटनीतिक संतुलन साध रहा है। एक तरफ ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं, तो दूसरी तरफ खाड़ी के अरब देशों के साथ भारत की गहरी रणनीतिक दोस्ती है। ईरान और अमेरिका/इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं, जो भारत के व्यापार और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

निष्कर्ष ईरान और भारत के बीच यह संवाद ऐसे समय पर हुआ है जब फरवरी से जारी संघर्ष के कारण पूरा क्षेत्र अशांत है। डोभाल और रेजाई के बीच हुई यह हाई-प्रोफाइल फोन कॉल संकेत देती है कि भारत अब इस संकट में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए आक्रामक कूटनीति अपना रहा है।

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