देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का पर्याय बन चुके जंतर-मंतर का युग अब समाप्त हो गया है। दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा फैसला लेते हुए जंतर-मंतर को अधिकृत धरना स्थलों की सूची से बाहर कर दिया है। अब प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित अन्य स्थानों पर ही जाना होगा।
क्या हैं नए विकल्प? दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार, अब प्रदर्शन के लिए केवल तीन जगहों को चिन्हित किया गया है:
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला? जंतर-मंतर को हटाने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद लिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर संसद भवन के बेहद करीब है, जो देश की संप्रभुता का प्रतीक है। यहां अक्सर होने वाली भीड़ और प्रदर्शनकारियों द्वारा बार-बार संसद की ओर कूच करने की कोशिशों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी थीं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव अदालत में यह बात भी प्रमुखता से उठी कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए नागरिक सुविधाओं का भारी अभाव है। आसपास वीवीआईपी आवास होने के कारण वहां शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं सीमित हैं। लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों में विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
इमरजेंसी सेवाओं में बाधा जंतर-मंतर के संकरे रास्तों और प्रदर्शनकारियों की भीड़ के कारण एंबुलेंस जैसी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को पहुंचने में गंभीर दिक्कतें आ रही थीं। जाम की स्थिति के चलते किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में स्थानीय नागरिकों या प्रदर्शनकारियों को समय पर मदद पहुंचाना मुश्किल हो रहा था।
लोकतंत्र और सुरक्षा का संतुलन अदालत ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सर्वोपरि है, लेकिन यह अधिकार किसी की सुरक्षा या सामान्य जनजीवन को बाधित नहीं करना चाहिए। सुरक्षा और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अब जंतर-मंतर के बजाय उन स्थलों को प्राथमिकता दी गई है, जहाँ बड़े स्तर पर भीड़ को नियंत्रित करना और बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना आसान है।
Ministry of Home Affairs, Government of India, had constituted a Committee to examine alternative proper venues for citizen s right for organizing protest/demonstrations in place of the existing designated site .
— ANI (@ANI) October 12, 2026
Based on the Committee s recommendations, Jantar Mantar as a… pic.twitter.com/VDXSqXFu7S
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