उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है। लखनऊ से सटा बाराबंकी जिला इस समय चर्चा के केंद्र में है। 2022 के चुनाव में यहां भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर रही थी, जहां दोनों दलों ने 3-3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब 2027 से पहले स्थिति बदल रही है; लड़ाई अब केवल भाजपा बनाम विपक्ष की नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर भी तेज हो गई है।
आंकड़ों का गणित: जीत-हार का बेहद करीबी अंतर बाराबंकी की चुनावी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2022 में कई सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम रहा। कुर्सी सीट पर भाजपा ने सपा को मात्र 217 वोटों से हराया, जबकि रामनगर में सपा ने भाजपा को महज 261 वोटों से मात दी। जिले की 6 विधानसभा सीटों (कुर्सी, रामनगर, बाराबंकी सदर, जैदपुर, दरियाबाद और हैदरगढ़) में जैदपुर और हैदरगढ़ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। बाकी चार सीटें सामान्य श्रेणी की हैं, जहां मुकाबला हमेशा से कड़ा रहा है।
सपा-कांग्रेस में सीटों को लेकर खींचतान 2024 के लोकसभा चुनाव में बाराबंकी से कांग्रेस के तनुज पुनिया की जीत ने जोश बढ़ाया है। अब 2027 की तैयारी को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन धर्म की परीक्षा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सपा जिले की सभी 6 सीटों पर अपनी दावेदारी जता रही है, जबकि स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व कम से कम तीन सीटों पर अड़ा हुआ है। इस खींचतान के बीच भाजपा अपनी मजबूत सीटों—दरियाबाद और हैदरगढ़—को सुरक्षित रखने और कुर्सी पर अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
बाराबंकी का सामाजिक और राजनीतिक ताना-बाना जनगणना 2011 के अनुसार, बाराबंकी की आबादी करीब 32.61 लाख है, जिसमें लगभग 90 फीसदी लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। धार्मिक आधार पर देखें तो यहां हिंदू आबादी करीब 77 फीसदी और मुस्लिम आबादी करीब 23 फीसदी है। राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो 2008 के परिसीमन के बाद यहां का सियासी नक्शा बदला है। कभी कांग्रेस और भाजपा का गढ़ रही हैदरगढ़ जैसी सीटों पर अब नए समीकरण बन रहे हैं, जबकि बाराबंकी सदर सीट पर सपा के धर्मराज सिंह यादव का दबदबा बरकरार है।
क्या है मौजूदा हालात? सपा जहां अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए जिले की अन्य सीटों पर बढ़त बनाने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई साख वापस पाने के लिए सीटों पर समझौते को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, भाजपा के लिए चुनौती अपनी पुरानी बढ़त बनाए रखने की है। 2017 में भाजपा ने यहां 6 में से 5 सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसे दोहराना अब उसके लिए बड़ी चुनौती है।
Q. बाराबंकी जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं? A. जिले में कुल छह सीटें हैं: कुर्सी, रामनगर, बाराबंकी (सदर), जैदपुर, दरियाबाद और हैदरगढ़।
Q. कौन-सी सीटें आरक्षित हैं? A. जैदपुर और हैदरगढ़ सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
Q. 2022 के नतीजों की स्थिति क्या थी? A. भाजपा और सपा दोनों दलों को 3-3 सीटें मिली थीं।
Q. किन सीटों पर सबसे करीबी मुकाबला था? A. कुर्सी और रामनगर सीट पर जीत-हार का अंतर 300 वोटों से भी कम था।
Q. सपा और कांग्रेस के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या है? A. सीटों का बंटवारा। सपा सभी 6 सीटों की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस कम से कम 3 सीटें मांग रही है।
*मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath ने गोरखपुर- फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्री ध्रुव त्रिपाठी के समर्थन में गोरखपुर में आयोजित शिक्षक सम्मेलन को सम्बोधित किया। pic.twitter.com/eh22kBxxjA
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 12, 2026
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