शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका: प्रवक्ता आनंद दुबे ने छोड़ी पार्टी, विचारधारा पर उठाए गंभीर सवाल
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महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रमुख हिंदी भाषी चेहरे और प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस्तीफा दे दिया है। दुबे का इस्तीफा पार्टी की कार्यप्रणाली और वैचारिक दिशा को लेकर पैदा हुई गहरी नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है।

मैं विचारधारा से समझौता नहीं कर सकता इस्तीफा देने के बाद भावुक नजर आए आनंद दुबे ने कहा कि उन्होंने बहुत दुखी मन से पार्टी छोड़ी है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से उन्होंने अपना तन, मन और धन पार्टी को समर्पित किया। लेकिन पिछले कुछ महीनों से वे पार्टी की लाइन के साथ खुद को नहीं जोड़ पा रहे थे।

मेरा नेता शरजील इमाम या ध्रुव राठी नहीं हो सकते दुबे ने पार्टी पर तीखे हमले करते हुए कहा कि, मेरा नेता कभी शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं हो सकता। मेरे आदर्श भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में ऐसे लोग हावी हो गए हैं जो विचारधारा के विपरीत काम कर रहे हैं।

सावरकर का अपमान और गठबंधन पर सवाल आनंद दुबे ने महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर उनके हीरो हैं, लेकिन गठबंधन के लोग उनका अपमान करते हैं। सनातन धर्म को डेंगू बताने और भगवान राम व शंकर के बीच भेदभाव करने जैसी बातों से वे बेहद आहत थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे देश, सनातन धर्म या हिंदुत्व के खिलाफ जाकर काम करने से बेहतर मरना पसंद करेंगे।

वोट चोरी के दावों पर तंज विपक्षी गठबंधन द्वारा बार-बार वोट चोरी के आरोपों पर भी दुबे ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि, वोट चोरी नहीं होता, कुछ लोगों का दिमाग चोरी हो गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव परिणामों के बारे में गलत नैरेटिव फैलाया जा रहा है।

राजनीतिक समीकरणों पर क्या होगा असर? आनंद दुबे का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब MVA लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। शिवसेना (UBT) के लिए हिंदी भाषी वोट बैंक में पैठ बनाए रखने के लिए दुबे एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। उनके जाने से पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। फिलहाल, शिवसेना (UBT) की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और न ही दुबे ने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा किया है।

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