जंतर-मंतर पर अब नहीं होगा विरोध-प्रदर्शन! गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, दिल्ली में इन 3 जगहों पर होगा प्रोटेस्ट
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दिल्ली में दशकों से आंदोलनों का केंद्र रहा जंतर-मंतर अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर हो गया है। गृह मंत्रालय ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का हवाला देते हुए जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट के रूप में डिनोटिफाई (Denotify) कर दिया है।

अब कहां होंगे प्रदर्शन? गृह मंत्रालय की विशेष कमेटी की सिफारिशों के बाद, दिल्ली पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। अब से दिल्ली में कोई भी जनआंदोलन केवल इन तीन जगहों पर ही किया जा सकेगा:

  1. रामलीला मैदान
  2. बुराड़ी मैदान
  3. पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड

इन नए स्थलों पर प्रदर्शन के लिए विस्तृत नियम और शर्तें (SOP) भविष्य में जारी की जाएंगी।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? जंतर-मंतर को हटाने के पीछे आधिकारिक तौर पर सुरक्षा का कारण बताया गया है। यह स्थान संसद भवन और कई प्रमुख सरकारी दफ्तरों से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने और संसद के करीब पहुंचने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा कर दी थी। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन की मांग और NEET पेपर लीक मामले में चले लंबे आंदोलन के दौरान बिगड़ी स्थिति ने भी प्रशासन को इस फैसले पर मजबूर किया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बीते 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने भी एक सुनवाई के दौरान जंतर-मंतर के विकल्प पर चर्चा की थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध के लिए ऐसी जगह होनी चाहिए जहां पानी, टॉयलेट और मेडिकल जैसी बुनियादी सुविधाएं हों। कोर्ट ने जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों के अधिकार और आम नागरिकों की सुरक्षा व आवाजाही के बीच संतुलन जरूरी है।

पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर : CJP इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, जंतर-मंतर को अब युद्ध का मैदान बना दिया गया था। अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा। उन्होंने इस कदम को विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।

एक युग का अंत? जंतर-मंतर का इतिहास 2012 के निर्भया कांड, OROP आंदोलन, किसानों के प्रदर्शन और हालिया पहलवानों के धरने जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। अपनी लोकेशन के कारण यह सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या नए निर्धारित स्थल सरकार तक आम लोगों की आवाज उसी मजबूती से पहुंचा पाएंगे, या फिर दिल्ली में विरोध की राजनीति का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।

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