मराठी सिनेमा और रंगमंच जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर अभिनेत्री मधु कांबीकर का 73 वर्ष की आयु में पुणे में निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके निधन से मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।
अभिनय और लावणी का बेहतरीन मेल मधु कांबीकर ने अपने करियर की शुरुआत स्टेज शोज से की थी। वे न केवल एक मंझी हुई अभिनेत्री थीं, बल्कि लावणी कलाकार के तौर पर भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ फोक ड्रामा, कमर्शियल थिएटर और टीवी शोज में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। उन्हें फिल्म शापित से खास लोकप्रियता मिली थी।
नाना पाटेकर की मां बनकर बटोरीं सुर्खियां अभिनय की दुनिया में उन्होंने मां और सास के किरदारों में एक अमिट छाप छोड़ी। विशेष रूप से नाना पाटेकर के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा। उन्होंने हम दोनों और यशवंत जैसी फिल्मों में नाना पाटेकर की मां का यादगार किरदार निभाया था।
डांस परफॉर्मेंस के दौरान बिगड़ी थी तबीयत मधु कांबीकर के स्वास्थ्य में गिरावट 2016 के बाद से शुरू हुई थी। बताया जाता है कि 27 नवंबर 2016 को एक प्रोग्राम के दौरान 12 साल बाद उन्होंने मंच पर लावणी परफॉर्म की थी। डांस के दौरान ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, लेकिन उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस बीच में नहीं छोड़ी। मेकअप रूम में जाने के बाद उन्हें स्ट्रोक आया, जिससे उनका दायां हिस्सा प्रभावित हो गया था।
सीएम फडणवीस ने दी श्रद्धांजलि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अभिनेत्री के निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, मधु कांबीकर जी का निधन मराठी मनोरंजन जगत के लिए बड़ी क्षति है। हेच माझं माहेर , रघुमैना और झपाटलेला जैसी फिल्मों में उनके किरदार हमेशा याद किए जाएंगे। वे कला के प्रति समर्पित थीं और लोक-कलाओं को जीवित रखने में उनका योगदान अतुलनीय है।
मराठी सिनेमा में उनके चार दशकों से अधिक के शानदार सफर के लिए उन्हें जी चित्र गौरव लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया था। उनकी बेटी शीतल जाधव ने उनकी ओर से यह सम्मान ग्रहण किया था। मधु कांबीकर का जाना भारतीय कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
*ज्येष्ठ अभिनेत्री मधू कांबीकर जी यांच्या निधनाचे वृत्त अतिशय दुःखद आहे. चित्रपट, लोकनाट्य, व्यावसायिक रंगभूमी आणि दूरदर्शन मालिकांमध्ये त्यांनी अनेक महत्त्वपूर्ण भूमिका साकारल्या होत्या. ‘हेच माझं माहेर’, ‘राघुमैना’, ‘एक होता विदूषक’, ‘झपाटलेला’, ‘डेबू’ आणि ‘येऊ का घरात’… pic.twitter.com/950eQcdPcJ
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) October 12, 2026
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