प्रेमानंद महाराज के आश्रम में मौत का रहस्य: क्या ड्रग्स के नशे में थी शिष्य की अस्वाभाविक हरकतें?
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वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम गुरु कृपा कुंज में 25 सितंबर को एक 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण (दीपक लोधी) की मौत ने देशभर में हलचल मचा दी है। चौथी मंजिल से गिरकर हुई शिष्य की मौत अब आत्महत्या से अधिक एक मेडिकल मिस्ट्री और साजिश की ओर इशारा कर रही है।

ग्राइंडर से कटा अंग, फिर भी सीढ़ियां चढ़ता रहा शिष्य

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रसिक दुलारी का प्राइवेट पार्ट ग्राइंडर से कटा हुआ पाया गया। यह चोट इतनी गंभीर है कि अत्यधिक रक्तस्राव के कारण व्यक्ति का तुरंत बेहोश होना या चलना-फिरना असंभव है। हालांकि, सामने आए CCTV फुटेज में मृतक बेहद शांत और सामान्य तरीके से सीढ़ियां चढ़ते हुए चौथी मंजिल तक जाता दिखाई दे रहा है।

इस फुटेज ने पुलिस और मेडिकल विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। दर्द की कोई प्रतिक्रिया न होना किसी गहरे मानसिक सदमे या किसी नशीले पदार्थ के प्रभाव की ओर इशारा कर रहा है।

टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट से खुलेगा ड्रग्स का राज

पुलिस अब इस एंगल से जांच कर रही है कि क्या उस समय रसिक दुलारी किसी विशेष सायकोएक्टिव नशीले पदार्थ के असर में थे? मथुरा पुलिस ने मृतक का ब्लड सैंपल फोरेंसिक लैब और टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए भेजा है।

अधिकारियों का कहना है कि अगर रिपोर्ट में नशीले पदार्थ की पुष्टि होती है, तो यह जांच का विषय होगा कि आश्रम में नशा कहां से आया और इसे कौन नियंत्रित कर रहा था। हालांकि, फिलहाल पुलिस ने किसी भी ड्रग नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

आश्रम की कड़ी सुरक्षा और डिजिटल निगरानी पर सवाल

जांच में यह बात भी सामने आई है कि आश्रम के साधकों के लिए नियम काफी सख्त थे। साधकों का निजी मोबाइल फोन जमा कराकर आश्रम द्वारा नए सिम दिए जाते थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन सिम कार्डों की निगरानी की जाती थी और क्या किसी को बाहरी दुनिया से कटकर रहने का मानसिक दबाव दिया जा रहा था।

भू-माफिया की साजिश या अंदरूनी गुटबाजी?

इस रहस्यमयी मौत के बाद स्थानीय साधु-संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने (Z+ Security) की मांग की है। संतों का आरोप है कि आश्रम के भीतर दो गुट बन चुके हैं, जिनमें से कुछ भू-माफियाओं के साथ मिलकर संपत्ति के विवादों में लिप्त हो सकते हैं। मौत के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

पुलिस की जांच अब तीन रिपोर्टों पर टिकी

फिलहाल मथुरा पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली तीन मुख्य रिपोर्टों के इर्द-गिर्द घूम रही है:

  1. CCTV फुटेज: कमरे से निकलने से लेकर चौथी मंजिल तक की गतिविधियों की बारीकी से जांच।
  2. FSL और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट: शरीर में किसी भी नशीले या प्रतिबंधित पदार्थ की मौजूदगी का खुलासा।
  3. पोस्टमार्टम और फोरेंसिक साक्ष्य: चोटों की प्रकृति और घटना के तरीके का वैज्ञानिक विश्लेषण।

पुलिस ने अब तक आश्रम से जुड़े 30 से अधिक लोगों से पूछताछ की है। क्या यह एक सोची-समझी आत्महत्या थी, किसी ड्रग्स का दुष्प्रभाव, या फिर कोई गहरा षड्यंत्र—इन सवालों के जवाब अब फोरेंसिक रिपोर्ट के आने के बाद ही मिल पाएंगे।

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