फ्रांस की सड़कों पर उतरे Gen-Z का महा-आंदोलन: शिक्षा व्यवस्था से उपजी चिंगारी कैसे बनी राष्ट्रीय संकट ?
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पेरिस: फ्रांस की सड़कें इस समय युवाओं के गुस्से की गवाह बनी हुई हैं। सितंबर में पेरिस के उत्तर से शुरू हुआ छात्रों का एक छोटा सा विरोध अब पूरे देश में फैल चुका है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन अब हिंसक मोड़ ले चुका है, जिसने फ्रांस सरकार की नींद उड़ा दी है।

कैसे हुई शुरुआत? इस आंदोलन की नींव 21 सितंबर को पेरिस के सेंट-एक्सुपरी हाई स्कूल में पड़ी थी। वहां छात्र और शिक्षक मिलकर संसाधनों की कमी का विरोध कर रहे थे। एक बार के लिए जब उनकी मांगें पूरी हुईं, तो लगा कि मामला शांत हो गया है, लेकिन यह चिंगारी पूरे देश में फैल गई। अब छात्र मांग रहे हैं कि पूरे फ्रांस की शिक्षा प्रणाली के ढांचे को बदला जाए।

विरोध बना हिंसक, पुलिस से सीधी झड़प विरोध प्रदर्शन का दायरा इतना बढ़ गया है कि पिछले एक हफ्ते में सैकड़ों स्कूल बंद करने पड़े हैं। छात्र अब स्कूलों के गेट बंद कर रहे हैं, बैरिकेड लगा रहे हैं और कचरे के डिब्बों में आग लगा रहे हैं। कई शहरों में पुलिस और छात्रों के बीच हुई झड़पों में कई छात्र घायल हुए हैं। एक छात्र का हाथ गंभीर रूप से फ्रैक्चर हो गया, तो किसी की आंखों की रोशनी चली गई।

5 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। करीब 5,060 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से 87 प्रतिशत नाबालिग हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इन गिरफ्तार युवाओं का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। शिक्षा मंत्री ने इसे हिंसक अल्पसंख्यकों का काम करार दिया है, जबकि विपक्ष और छात्रों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनहीन है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल फ्रांस के छात्रों का गुस्सा जायज माना जा रहा है क्योंकि वे दशकों पुरानी अव्यवस्था से जूझ रहे हैं। कक्षाओं में डेस्क-कुर्सियों की कमी, जर्जर इमारतें और शिक्षकों के खाली पद छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऊपर से महंगाई की मार और मुद्रास्फीति (Inflation) के मुकाबले शिक्षा बजट में मामूली बढ़ोतरी ने आग में घी का काम किया है।

कई मोर्चों पर घिरी सरकार फ्रांस की सरकार के लिए यह प्रदर्शन सिर्फ एक मोर्चा है। देश पहले ही करीब 4 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज, बढ़ती महंगाई और पेंशन खर्चों के दबाव में है। रूसी-यूक्रेन युद्ध के कारण रक्षा बजट बढ़ना और सरकारी कर्मचारियों से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों तक की अलग-अलग मांगों ने सरकार को चारों तरफ से घेर लिया है।

निष्कर्ष फ्रांस में आज जो हो रहा है, वह सिर्फ स्कूलों का विवाद नहीं है। यह उस पीढ़ी का विद्रोह है जो अपनी शिक्षा और भविष्य को असुरक्षित महसूस कर रही है। यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन और अधिक हिंसक रूप ले सकता है, जिसका असर फ्रांस की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता पर पड़ना तय है।

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