अखिलेश का भाजपा पर तीखा प्रहार: समाजवादी पसीना बहाने से नहीं डरते, बैरिकेडिंग से घबराई है सरकार
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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ताधारी दल पूरी तरह घबराया हुआ है। अखिलेश ने कहा, समाजवादी लोग संघर्ष और पसीना बहाने से कभी पीछे नहीं हटते, लेकिन भाजपा घबराहट में प्रशासन का सहारा लेकर हर जगह बैरिकेडिंग करवा रही है।

वोटर फॉर्म में धांधली का आरोप अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जा रही है। उन्होंने नंदलाल निषाद और दशरथ नाम के व्यक्तियों का जिक्र करते हुए प्रशासन से पूछा कि इन लोगों के नाम पर इतनी भारी संख्या में फॉर्म कैसे भरे गए? उन्होंने इन फॉर्म पर मौजूद हस्ताक्षरों की जांच की मांग की है।

नियमों की अनदेखी का दावा पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति के नाम से सीमित संख्या में ही आपत्तियां या फॉर्म स्वीकार किए जा सकते हैं। सपा कार्यकर्ताओं द्वारा इन गड़बड़ियों को पकड़े जाने का दावा करते हुए अखिलेश ने मांग की कि प्रशासन इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को सार्वजनिक करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, पार्टी चुप नहीं बैठेगी।

चंडीगढ़ से यूपी तक चुनावी साजिश का डर अखिलेश ने अपने संबोधन में चंडीगढ़ और यूपी की चुनावी तस्वीरों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने-धमकाने और रोकने की घटनाओं को जनता कभी नहीं भूलेगी। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी कार्यकर्ता जमीन पर डटे हुए हैं और भाजपा की हर चाल का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।

PDA से ही भाजपा का सफाया पार्टी की रणनीति पर बोलते हुए अखिलेश ने दोहराया कि उनका PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला आगामी चुनावों में भाजपा को सत्ता से बाहर कर देगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से ही वे अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मेहनत करने वाले समाजवादी कार्यकर्ता ही असल ताकत हैं।

सीट बंटवारे पर विनेबिलिटी का फॉर्मूला गठबंधन और सीटों के मुद्दे पर अखिलेश ने साफ किया कि चुनाव में सीटों की मांग का आधार विनेबिलिटी (जीतने की क्षमता) होती है। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों के साथ बातचीत एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। हालांकि, फिलहाल उन्होंने सीटों के आंकड़ों पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी रणनीति के तहत जो दल या उम्मीदवार जीत की मजबूत संभावनाएं रखेगा, प्राथमिकता उसी को दी जाएगी।

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