शेयर बाजार: ‘विनर्स’ नहीं ‘लूजर्स’ का खेल है निवेश, जानिए देविना मेहरा से बचने का मंत्र
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क्या आप भी केवल मल्टीबैगर की तलाश में हैं? शेयर बाजार में हर निवेशक जल्द से जल्द पैसा दोगुना या दस गुना करने के जुनून में रहता है। हर कोई यह जानना चाहता है कि कौन सा स्टॉक अगली बड़ी तेजी लाएगा। लेकिन फर्स्ट ग्लोबल की संस्थापक देविना मेहरा का मानना है कि आज के दौर में निवेश की रणनीति बदलने की जरूरत है। उनका कहना है कि असली चुनौती विनर ढूंढना नहीं, बल्कि बड़ी हार से बचना है।

लूजर गेम का असली मतलब क्या है? देविना मेहरा के मुताबिक, निवेश का मतलब अब जीतने का खेल नहीं, बल्कि लूजर गेम बन गया है। इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि निवेश घाटे का सौदा है। इसका मतलब यह है कि आज बाजार में सूचनाओं की भरमार है। पहले सीमित जानकारी के दौर में जिनके पास अंदरूनी खबरें होती थीं, वे जीतते थे। अब डेटा सस्ता और सुलभ है, इसलिए सूचना से ज्यादा अहम यह है कि आप उपलब्ध डेटा का उपयोग करके रिस्क को कैसे नियंत्रित करते हैं।

50% नुकसान की भरपाई का गणित समझिए निवेश में डाउनसाइड रिस्क सबसे खतरनाक होता है। अगर आपका पोर्टफोलियो 50% गिर जाता है, तो उसे दोबारा पुराने स्तर पर लाने के लिए आपको 50% नहीं, बल्कि 100% रिटर्न की जरूरत होगी। यदि गिरावट 70% तक पहुंच जाए, तो पुराने स्तर तक पहुंचने के लिए आपको 233% का रिटर्न चाहिए होगा। बड़ा नुकसान न केवल आपकी संपत्ति कम करता है, बल्कि यह भविष्य की कंपाउंडिंग की पूरी रफ्तार को रोक देता है।

गलत स्टॉक्स से दूर रहना ही बड़ी जीत है सोशल मीडिया के दौर में हर दिन कोई न कोई शेयर मल्टीबैगर बताया जाता है। मेहरा का कहना है कि हर तेजी को पकड़ना जरूरी नहीं है। कई बार निवेशक गिरते हुए खराब फंडामेंटल्स वाली कंपनी के शेयरों को सिर्फ इस उम्मीद में पकड़े रहते हैं कि वे वापस ऊपर आएंगे। यह उम्मीद पोर्टफोलियो को डूबो सकती है। गलत मौके को पहचानकर उससे बाहर निकल जाना ही समझदारी है।

असली सफलता का पैमाना देविना मेहरा के अनुसार, निवेश में सफलता को केवल मल्टीबैगर के आधार पर नहीं तौलना चाहिए। जो निवेशक अपनी पूंजी को बड़े नुकसान से बचाकर सुरक्षित रखता है और लंबी अवधि तक कंपाउंडिंग का फायदा उठाता है, वही बाजार में असली विजेता साबित होता है। इसलिए, अगली बड़ी डील के पीछे भागने से पहले अपनी कैपिटल को प्रोटेक्ट करना सीखें।

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