उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हनुमान मंदिर परिसर में दो बुजुर्ग साधुओं की जघन्य हत्या ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। खुदागंज थाना क्षेत्र के सूथा गांव में 30 सितंबर की देर रात मंदिर में रहने वाले गोपाल दास और बड़े दास के जले हुए शव बरामद हुए। शुरुआती जांच में दोनों को तख्त से बांधकर आग लगाने की बात सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने सुमित सिंह नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के सामने फिलहाल एक बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों साधुओं की पहले हत्या की गई थी या उन्हें तख्त से बांधकर जिंदा जला दिया गया। शाहजहांपुर के एसपी सौरभ दीक्षित के अनुसार, इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया यह स्पष्ट करेगी कि मौत का वास्तविक कारण और समय क्या था। पुलिस फिलहाल घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
पुलिस की शुरुआती जांच में मंदिर की जमीन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का एंगल सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपी सुमित सिंह और मंदिर में रहने वाले दोनों बुजुर्गों के बीच जमीन पर कब्जे को लेकर अक्सर अनबन होती थी। घटना की रात आरोपी ने पहले गांव की लाइट काटी और फिर मंदिर पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया। हालांकि, पुलिस इसे अभी किसी धार्मिक हत्या के बजाय जमीन विवाद से जोड़कर देख रही है।
आरोप है कि आरोपी सुमित सिंह हाल ही में जेल से बाहर आया था और उस पर पहले भी कार जलाने और एससी-एसटी एक्ट जैसे कई मामले दर्ज हैं। ग्रामीण उस पर पुरानी आगजनी की घटनाओं में शामिल होने के भी आरोप लगा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि उसके खिलाफ अतीत में क्या मामले थे और क्या इस वारदात में कोई और भी शामिल हो सकता है।
इस घटना के सामने आते ही लोग इसकी तुलना 2020 के पालघर साधु हत्याकांड से कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों मामलों में बड़ा अंतर है। पालघर में यह भीड़ द्वारा की गई हिंसा (मॉब लिंचिंग) थी, जबकि शाहजहांपुर का मामला शुरुआती तौर पर व्यक्तिगत जमीन विवाद और बदले की भावना से प्रेरित नजर आता है। वहीं, हाल ही में आजमगढ़ में हुई पुजारियों की हत्या के साथ भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन दोनों घटनाओं की परिस्थितियां एक-दूसरे से भिन्न हैं।
यूपी में चुनाव के करीब आते ही साधुओं पर हुए इस हमले ने राजनीतिक गरमाहट बढ़ा दी है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने के मौके के तौर पर देख रहा है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले इसे चुनावी मुद्दा बनाना जल्दबाजी होगी। प्रशासनिक और पुलिस महकमा अब इस मामले में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, पुराने कानूनी विवादों और पुलिस की पूर्व लापरवाही जैसे पहलुओं पर जवाब तलाश रहा है। फिलहाल, आरोपी सलाखों के पीछे है और जांच का रुख पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिका है।
*शाहजहांपुर के खुदागंज थाना क्षेत्र के सूता गांव स्थित मंदिर में दो साधुओं के जले हुए शव मिलने से हड़कंप मच गया। मृतकों की पहचान बाबा गोपाल दास और बाबा बिहारी दास के रूप में हुई है। पुलिस मंदिर पर कब्जे को लेकर हुए विवाद समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है। @Uppolice… pic.twitter.com/qOpguoCKR1
— TNP NEWS (@TNPNEWS1) October 1, 2026
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