फ्लाईदुबई कांड का हैरान करने वाला सच: स्मित मच्छार पर क्रैश एक्स से हुआ था जानलेवा हमला
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दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई (flydubai) फ्लाइट FZ1073 को हाईजैक होने और क्रैश होने से बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में है। इस घटना को लेकर अब एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है—हमलावर को-पायलट ने स्मित पर चाकू से नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद क्रैश एक्स (विमान की आपातकालीन कुल्हाड़ी) से हमला किया था।

हथियार बाहर से नहीं आए, कॉकपिट में ही थी कुल्हाड़ी जांच में स्पष्ट हुआ है कि हमलावर ओमानी को-पायलट ने कोई बाहरी हथियार तस्करी करके विमान में नहीं चढ़ाया था। उसने कॉकपिट में पहले से सुरक्षा के लिए रखी गई फायर एक्स यानी क्रैश एक्स का इस्तेमाल किया। इस घातक हमले में कैप्टन स्मित मच्छार की गर्दन और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी खुद सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में इस कुल्हाड़ी के इस्तेमाल की पुष्टि की है।

इमरजेंसी टूल का पहली बार हुआ है दुरुपयोग विमानों में क्रैश एक्स रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसका मकसद किसी को चोट पहुंचाना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में जान बचाना होता है। कॉकपिट में बिजली के तारों में आग लगने पर पैनल काटकर आग बुझाने या दुर्घटना की स्थिति में मलबा हटाकर वैकल्पिक निकास मार्ग बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। विमानन इतिहास में यह पहली बार है जब इस सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल किसी को घायल करने के लिए किया गया है।

मौत के मुंह से यात्रियों को निकाला यह घटना 30 सितंबर 2026 की है, जब फ्लाइट FZ1073 करीब 32 हजार फीट की ऊंचाई पर थी। विमान में 170 से अधिक लोग सवार थे। को-पायलट की अचानक बदली हुई हिंसक हरकत के बावजूद, मरणासन हालत में भी कैप्टन स्मित मच्छार ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने न केवल विमान को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाया, बल्कि कॉकपिट का दरवाजा खोलकर अन्य क्रू-मेंबर्स और यात्रियों को अंदर आने का मौका दिया, जिससे हमलावर को काबू किया जा सका।

वैश्विक स्तर पर मिल रही सराहना कैप्टन स्मित मच्छार की इस अदम्य साहस और सूझबूझ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित विश्व के शीर्ष नेताओं ने सराहना की है। पीएम मोदी ने स्मित की पत्नी से फोन पर बात कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया है और उनकी बहादुरी को नमन किया है। फिलहाल, इस घटना के बाद विमानन सुरक्षा मानकों की समीक्षा की मांग जोर पकड़ रही है।

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