झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: बुंदेलखंड की नई लाइफलाइन, अब दिल्ली तक का सफर होगा और भी तेज़
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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल तेजी से बिछ रहा है। इसी क्रम में झांसी लिंक एक्सप्रेसवे एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। 106.3 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल झांसी को सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा, बल्कि विकास की नई राहें भी खोलेगा।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव

यह एक्सप्रेसवे जालौन जिले के फूलपुरा गांव के पास से शुरू होकर झांसी के अंबाबाई तक जाएगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद, यहां से ट्रैफिक सीधे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और आगे दिल्ली के नेटवर्क तक पहुंच सकेगा। यह सड़क पूरी तरह से एक्सेस-कंट्रोल्ड होगी, जिसका अर्थ है कि सामान्य सड़कों की तरह बीच में कहीं भी वाहन नहीं चढ़ सकेंगे; इसके लिए निर्धारित इंटरचेंज का ही उपयोग होगा।

दो पैकेज में बंटा काम, विकास की बड़ी तैयारी

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने इस परियोजना को दो पैकेजों में बांटा है।

यह पूरा मार्ग छह लेन का बनाया जा रहा है, जिसे भविष्य में जरूरत पड़ने पर आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसमें 25 व्हीकुलर अंडरपास, कई फ्लाईओवर और पुलों का निर्माण भी शामिल है।

डिफेंस कॉरिडोर और बीआईडीए (BIIDA) को मिलेगा बड़ा बूस्ट

यह एक्सप्रेसवे केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योग और रक्षा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। मार्ग का अंत बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIIDA) के पास होने से नवनिर्मित औद्योगिक क्षेत्रों को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा, डिफेंस कॉरिडोर में आने वाली फैक्ट्रियों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान हो जाएगी, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ी ताकत मिलेगी।

लागत और निर्माण की समयसीमा

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये से अधिक है। निर्माण कार्य के लिए 1,095 दिन यानी तीन साल का लक्ष्य रखा गया है। हाल ही में इसके लिए वित्तीय बोलियां भी खुल चुकी हैं, जिनमें कई बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां दौड़ में शामिल हैं।

झांसी के लिए क्या बदलेगा?

झांसी पहले से ही एक महत्वपूर्ण शहर है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के जरिए इसकी कनेक्टिविटी का स्तर पूरी तरह बदल जाएगा। जालौन और झांसी के करीब 28 गांवों से होकर गुजरने वाला यह मार्ग न केवल यात्रा के समय में भारी कमी लाएगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा करेगा।

आने वाले तीन वर्षों में जब यह एक्सप्रेसवे बनकर तैयार होगा, तो झांसी बुंदेलखंड के औद्योगिक और आवागमन नेटवर्क का केंद्र बिंदु बनकर उभरेगा।

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