जनगणना 2027: पीएम मोदी की अपील, अब 32 करोड़ परिवारों की गणना पूरी; डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ने का मौका
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से आगामी जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है। सरकार इसे एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभ्यास मान रही है, जो भविष्य की विकास योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं की नींव रखेगा।

32 करोड़ परिवारों की गणना पूरी दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री की अपील को दोहराते हुए कहा कि अब तक देश के करीब 32 करोड़ परिवारों की गणना का काम पूरा किया जा चुका है। उन्होंने जोर दिया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह सटीक नीतियां बनाने का आधार है। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को समझने और विकास कार्यों को धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी।

16 भाषाओं में स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता स्व-गणना का विकल्प है। नागरिक अब खुद ऑनलाइन माध्यम से अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक विशेष सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी जारी की जाती है, जिससे बाद में गणनाकर्मी आसानी से डेटा का सत्यापन कर सकते हैं।

पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना जनगणना 2027 देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है। इसमें गणनाकर्मी मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए डेटा सीधे एकत्र कर रहे हैं। साथ ही, सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। सरकार का कहना है कि डिजिटल होने से डेटा संग्रह न केवल तेज हुआ है, बल्कि इसमें पारदर्शिता और सुरक्षा भी बढ़ी है। व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है।

दो चरणों में हो रही प्रक्रिया यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जा रही है:

  1. हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना: इसमें घरों की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं का डेटा जुटाया जा रहा है।
  2. जनसंख्या गणना: इसमें जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा और रोजगार जैसे पहलुओं पर जानकारी ली जाएगी। इस चरण में जाति गणना को भी शामिल किया गया है।

आंकड़ों पर आधारित भविष्य की नीतियां यह भारत की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना है। सरकार ने इस डिजिटल महा-अभियान के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना से प्राप्त विश्वसनीय डेटा एविडेंस-बेस्ड पॉलिसीमेकिंग के लिए अनिवार्य है। नागरिकों द्वारा दी गई सही जानकारी ही आने वाले वर्षों में बेहतर बुनियादी ढांचे और जन-कल्याणकारी योजनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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