सिल्वर ओक की रणनीति और 17 सूत्रीय वार: शरद पवार का महाराष्ट्र में कमबैक प्लान तैयार
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) अपने दिग्गज नेता शरद पवार के नेतृत्व में चुनावी रणभूमि के लिए पूरी तरह तैयार है। मुंबई स्थित सिल्वर ओक में हुई मैराथन बैठकों ने पार्टी के भविष्य के रोडमैप को साफ कर दिया है।

सिल्वर ओक में बनी चुनावी रणनीति शरद पवार ने अपने निजी आवास पर पहले पार्टी के शीर्ष नेताओं और सांसदों के साथ एक विशेष बैठक की। इसके अगले ही दिन राज्यभर के विधायकों और प्रमुख पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक बुलाई गई। यह स्पष्ट है कि पवार राज्य के वर्तमान राजनीतिक हालातों को देखते हुए एक आक्रामक और ठोस चुनावी योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

सूखे पर सरकार को घेरा महाराष्ट्र में 25 सितंबर 2026 को 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया गया है। लेकिन, राज्य सरकार द्वारा घोषित राहत उपायों को विपक्षी दल नाकाफी बता रहा है। शरद पवार ने इस मुद्दे को अपना मुख्य हथियार बनाया है। किसानों और खेतिहर मजदूरों की बदहाली को आधार बनाकर पार्टी फडणवीस सरकार की विफलता को उजागर करने में जुट गई है।

17 सूत्रीय मांगों का अल्टीमेटम समीक्षा बैठक के बाद शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को 17 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें सूखे से प्रभावित लोगों और विद्यार्थियों के लिए तत्काल सहायता के ठोस उपाय सुझाए गए हैं। पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए एक विशेष पत्रकार परिषद भी की, जिसमें शशिकांत शिंदे, हर्षवर्धन पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने सरकार की नीतियों की धज्जियां उड़ाईं।

नेताओं की सधी हुई भूमिका पवार गुट ने अपनी रणनीति में आक्रामकता और संयम का संतुलन बनाया है। जहाँ रोहित पवार और जितेंद्र आव्हाड जैसे नेता सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं, वहीं सुप्रिया सुले और शशिकांत शिंदे सरीखे नेता संयमित अंदाज में जनता के मुद्दों को उठा रहे हैं। यह तालमेल पार्टी को जनता के बीच अधिक विश्वसनीय बनाने की कवायद है।

पवार की कमान, मजबूत इरादे स्वास्थ्य संबंधी सीमाओं के बावजूद, शरद पवार खुद हर बारीक रणनीति पर नजर रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिखना और कार्यकर्ताओं में जोश भरना यह दर्शाता है कि पार्टी आगामी विधानसभा और 2029 के चुनावों के लिए अभी से पूरी ताकत झोंक रही है। सिल्वर ओक से निकली यह रणनीति अब धरातल पर कितनी कारगर होगी, यह आने वाले कुछ ही हफ्तों में साफ हो जाएगा।

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