दिल्ली पार्क गैंगरेप पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- पार्क और सड़कें हाई-रिस्क जोन नहीं बन सकतीं
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नई दिल्ली: दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ हुई गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले पर सोमवार (28 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर कड़ी नाराजगी जताई है।

क्या हमने निर्भया कांड से कुछ सीखा?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 2012 के भयावह निर्भया कांड का उल्लेख किया। कोर्ट ने तीखा सवाल किया कि क्या उस घटना से हमने कोई सबक लिया है? पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ हिंसा-मुक्त जीवन जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, और सार्वजनिक जगहों पर इसे सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।

क्या था आस्था कुंज पार्क का मामला?

पीड़िता अपने दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर गई थी, जहाँ से वे आस्था कुंज पार्क पहुंचे। आरोप है कि तीन युवकों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उन्हें रोका और लड़की को उसके मित्र से अलग कर दिया। इसके बाद पार्क के एक सुनसान हिस्से में लड़की के साथ गैंगरेप किया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के दौरान एक आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस की गोली से वह घायल हो गया।

सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

कोर्ट ने चिंता जताई कि पार्क, बस, मेट्रो स्टेशन और सबवे जैसी सार्वजनिक जगहें हाई-रिस्क जोन बनती जा रही हैं। सुरक्षा की कमी पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि आस्था कुंज पार्क में सीसीटीवी कैमरों का अभाव और खराब पड़े कैमरे प्रशासन की लापरवाही को दर्शाते हैं। कॉलेज की छात्राओं द्वारा पहले की गई शिकायतों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत न करना एक बड़ा प्रशासनिक फेल्योर है।

दिल्ली-NCR की अन्य घटनाओं पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने केवल कालकाजी ही नहीं, बल्कि स्वरूप नगर में नाबालिग के गैंगरेप और ग्रेटर नोएडा से आ रही बस में एक अन्य नाबालिग के यौन उत्पीड़न की घटनाओं का भी संज्ञान लिया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से इन सभी मामलों में विस्तृत जवाब मांगा है।

पुलिस की जवाबदेही तय

अदालत ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब दिल्ली पुलिस को यह बताना होगा कि इन हाई-प्रोफाइल अपराधों को रोकने के लिए प्रशासन ने क्या ठोस कदम उठाए हैं। न्यायिक हस्तक्षेप के बाद शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल और कड़े हो गए हैं।

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