नेपाल में कुदरत का कहर: 38 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, यूपी-बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा
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नेपाल में एक बार फिर मौसम का मिजाज खतरनाक हो गया है। मौसम विभाग ने 28 सितंबर के लिए देश के 38 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी ने न केवल नेपाल, बल्कि सीमा से सटे भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाकों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका

लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड (भूस्खलन) का खतरा बढ़ गया है। वहीं, तराई वाले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने की अपील की है। विशेष रूप से पहाड़ी सड़कों और नदी घाटियों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

लुम्बिनी और गंडकी प्रांत पर सबसे ज्यादा खतरा

मौसम विभाग के अनुसार, लुम्बिनी और गंडकी प्रांत के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका है। पोखरा, भैरहवा और घोराही जैसे शहरों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में जलभराव और नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की पूरी संभावना है।

इन नदियों के आसपास हाई अलर्ट

रूपन्देही, कपिलवस्तु, चितवन, नवलपरासी और आसपास के जिलों से बहने वाली नदियों के बहाव में तेजी देखी जा सकती है। इसके अलावा बागमती, कोशी, कर्णाली और नारायणी नदियों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है। नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद यूपी और बिहार की सीमा पर स्थित नदियां उफान पर आ सकती हैं।

पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए चेतावनी

नेपाल के हिमालयी और पहाड़ी इलाकों में जाने वाले पर्यटकों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक बाढ़ आने का खतरा है। प्रशासन ने खराब मौसम के दौरान जोखिम वाली ट्रैकिंग रूटों पर न जाने की सलाह दी है।

प्रशासन और आपातकालीन सहायता

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के मौसम विभाग (DHM) ने 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए हैं। आपातकालीन स्थिति या बाढ़ संबंधी जानकारी के लिए विभाग ने टोल-फ्री नंबर 1155 जारी किया है। प्रशासन ने निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने को कहा है।

पिछले अनुभवों से सीख

बता दें कि सितंबर का अंतिम सप्ताह नेपाल के लिए अक्सर चुनौतीपूर्ण रहा है। 2024 में भी इसी समय भारी बारिश के कारण बागमती, नारायणी और कोशी नदी बेसिन में गंभीर बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हुई थी, जिसने भारी तबाही मचाई थी। फिलहाल, प्रशासन किसी भी बड़ी अनहोनी को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठा रहा है।

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