मुख्य चुनाव आयुक्त पर पप्पू यादव का विवादित बयान: बिजली के खंभे पर लटकाकर दी जाए फांसी
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर देश में राजनीतिक पारा गरम हो गया है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी की है। पटना में मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दी जानी चाहिए।

पप्पू यादव का दावा है कि ज्ञानेश कुमार ने गरीबों, दलितों और वंचितों के वोटों की चोरी की है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को आतंकवादी और उग्रवादी से भी बड़ा अपराधी करार देते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान का गला घोंटा है।

चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति

विवाद की असली जड़ चुनाव आयोग के भीतर मचे आंतरिक कलह से जुड़ी है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी असहमति जताई है।

दोनों आयुक्तों का तर्क है कि कई महत्वपूर्ण निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिए गए। इनमें मतदाता सूची से नाम हटाने, चुनावी डेटाबेस के केंद्रीकरण और फॉर्म-6 में किए गए बदलाव शामिल हैं।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर घमासान

इस विवाद के केंद्र में एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि फॉर्म-6 में बदलाव कर मतदाताओं की जानकारी के साथ हेरफेर की जा रही है। विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने रिकॉर्ड पर यह बात रखी थी कि नियमों में बदलाव किए बिना फॉर्म-6 में नए प्रश्न जोड़ना अनधिकृत और अवैध है।

इसके अलावा, मतदाता डेटाबेस के डिजिटल सिस्टम पर अधिकारियों की पहुंच सीमित करने को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं, जिसे विपक्ष वोट चोरी की साजिश बता रहा है।

विपक्ष का हमला और राहुल गांधी की मांग

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से विपक्षी दलों ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले को सीधे तौर पर वोट चोरी से जोड़ते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले की जांच कराने की भी मांग की है।

अब क्या होगा?

पप्पू यादव ने मांग की है कि जब तक ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष को एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करना चाहिए। जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग के भीतर की यह आंतरिक तकरार अब सड़क की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।

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