चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का वॉर : चंडीगढ़ से पटना तक सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता, वाटर कैनन से हुआ सामना
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चंडीगढ़, लखनऊ और पटना में हल्ला बोल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर CEC के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की। चंडीगढ़ में सेक्टर-17 से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को अंततः वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा।

बैरिकेड्स पर पुलिस और कांग्रेस में टकराव चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व में भारी संख्या में नेता और कार्यकर्ता जमा हुए थे। पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश में पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें कीं और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। वहीं, लखनऊ और पटना में भी ऐसी ही तस्वीरें देखने को मिलीं, जहां पुलिस ने घेराव करने पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया।

वोट चोरी का गंभीर आरोप प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। राजा वडिंग ने आरोप लगाया कि देश में वोट चोरी हो रही है और भाजपा इस तरीके से सरकारें बना रही है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को न केवल पद से हटाया जाए, बल्कि उन पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

SIR प्रक्रिया पर कांग्रेस को क्यों है एतराज? विवाद का एक बड़ा कारण पंजाब में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया है। कांग्रेस का दावा है कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम लिस्ट से कटने का खतरा है। पार्टी की मांग है कि आने वाले विधानसभा चुनाव पुरानी मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाएं और SIR की प्रक्रिया को फिलहाल रोका जाए।

वरिष्ठ नेताओं ने खोला मोर्चा इस प्रदर्शन में सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह और बलबीर सिंह सिद्धू जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। रंधावा ने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा अधिकार मतदान का है और चुनाव आयोग इसे ही प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

आंतरिक असंतोष से बढ़ा विवाद यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग के भीतर का विवाद सार्वजनिक हो गया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची और डेटा से संबंधित निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ये फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए, जो पूरी चुनावी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।

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