ट्रंप को मिली टैरिफ वाली ताकत : रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता है 100% आयात शुल्क
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अमेरिका की हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 को मंजूरी दे दी है। 262 के मुकाबले 159 वोटों से पारित इस बिल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। यह बिल अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा।

भारत समेत 5 देशों पर लटकी तलवार इस कानून के तहत राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष 5 देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का विशेष अधिकार मिल गया है। इस सूची में भारत के अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान भी शामिल हैं। हालांकि, यूरोप के कई सहयोगी देशों को इसमें छूट दी गई है क्योंकि उन्होंने पहले ही रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम कर ली है।

कैसे पास हुआ नामुमकिन सा दिखने वाला बिल? एक हफ्ते पहले तक इस बिल का भविष्य अधर में लटका था। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच ट्रंप को टैरिफ का अधिक अधिकार देने को लेकर तीखा विवाद था। लेकिन सोमवार को हाउस रूल्स कमिटी द्वारा प्रक्रियात्मक बाधाएं हटाने के बाद स्थिति बदल गई। बुधवार को हुई वोटिंग में दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने अपनी पार्टी से हटकर रिपब्लिकन का साथ दिया, जिससे यह बिल आसानी से पारित हो गया।

क्या तुरंत लागू होगा टैरिफ? यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने के लिए मजबूर नहीं करता है। यह उन्हें एक विकल्प या अधिकार देता है कि वे चाहें तो इन देशों पर भारी शुल्क लगा सकते हैं। इसे विशेषज्ञ ट्रंप के लिए कूटनीतिक दबाव बनाने का एक बड़ा हथियार मान रहे हैं।

व्हाइट हाउस की चुप्पी और पुतिन को संदेश सीनेटर जीन शाहीन ने कहा कि यह बिल पुतिन के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि रूस के खिलाफ अमेरिका का रुख सख्त है। हालांकि, इस बिल के प्रति ट्रंप का व्यक्तिगत नजरिया अभी भी संशय में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस ने पर्दे के पीछे से कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों को मनाकर इस बिल को आगे बढ़ाने में मदद की है, ताकि इसे भविष्य में एक प्रभावी कूटनीतिक सौदेबाजी के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं या इसे केवल रूस पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल करेंगे।

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