क्या 2029 से पहले देशभर में लागू होगा UCC? अमित शाह के बयान से सियासत गरमाई, विपक्ष ने खोला मोर्चा
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समान नागरिक संहिता (UCC) एक बार फिर भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया है। गृह मंत्री अमित शाह के एक हालिया बयान ने देश में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने 2029 के आम चुनावों से पहले भाजपा शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने का भरोसा जताया है।

अमित शाह का बड़ा दावा मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा अपने एजेंडे पर अडिग है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में UCC पहले ही लागू किया जा चुका है और आगामी चुनावों से पूर्व सभी NDA शासित राज्यों में इसे धरातल पर उतारने की तैयारी है।

विपक्ष का तीखा हमला गृह मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर निशाना साधा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए इसे अंडरग्राउंड कम्युनल कॉन्स्पिरसी करार दिया। उन्होंने भाजपा को पुराने वादे याद दिलाते हुए कहा कि पहले जनता से किए गए वादे पूरे किए जाएं, उसके बाद नए जुमले लाए जाएं।

NDA के भीतर भी मतभेद? जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर NDA की एकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि UCC लागू करना संसद का काम है, राज्यों का नहीं। वहीं, बिहार में सत्ताधारी गठबंधन की सहयोगी पार्टी JDU ने भी रुख साफ नहीं किया है। JDU नेता राजीव रंजन ने जानकारी दी है कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जल्द ही गृह मंत्री से इस विषय पर चर्चा करेंगे, जिससे स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर भी मंथन जारी है।

ओवैसी का कड़ा विरोध AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14 और 29 का उल्लंघन बताया है। ओवैसी का आरोप है कि भाजपा समानता के नाम पर देश के 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने धर्म की स्वतंत्रता को खत्म करने का आरोप लगाते हुए इस कदम का पुरजोर विरोध किया है।

क्या चाहती है भाजपा? भाजपा का तर्क है कि वन नेशन, वन लॉ से देश में समानता आएगी। पार्टी का मानना है कि धर्म के आधार पर बने अलग-अलग पर्सनल लॉ (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार) महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं और समाज में विभाजन पैदा करते हैं।

अब सवाल यह है कि क्या भाजपा अपने इस साहसी कदम को 2029 से पहले सभी 21 राज्यों में अमलीजामा पहना पाएगी, या फिर सहयोगी दलों और विपक्ष के विरोध के चलते इसे संसद में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

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