मराठा आरक्षण: मुंबई की ओर बढ़े मनोज जरांगे, 18 दिन से जारी अनशन से सरकार की बढ़ी मुश्किलें
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महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की आग एक बार फिर तेज हो गई है। आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील ने अपना आंदोलन जालना के अंतरवाली सराटी गांव से मुंबई की ओर स्थानांतरित कर दिया है। 29 अगस्त 2026 से जारी उनका अनिश्चितकालीन अनशन अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

मुंबई कूच और पुलिस की बंदिशें जरांगे ने 19 सितंबर से आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। पहले वे भारी जनसमूह के साथ मुंबई पहुंचने वाले थे, लेकिन पुलिस से अनुमति न मिलने के कारण उन्होंने अपनी रणनीति बदली है। अब वे सीमित सहयोगियों के साथ मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं। पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए अनुमति लंबित रखी है।

जरांगे की मुख्य मांगें क्या हैं? जरांगे का मुख्य जोर मराठा समुदाय को सीधे आरक्षण देने के बजाय उन्हें कुनबी जाति प्रमाणपत्र दिलाने पर है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

कहां फंसा है पेंच? विवाद का असली कारण सरकार के आश्वासन और धरातल पर अमल के बीच का अंतर है। जरांगे का कहना है कि वे मौखिक वादों से थक चुके हैं और उन्हें अब स्पष्ट सरकारी आदेश चाहिए। दूसरी ओर, सरकार के सामने कानूनी चुनौतियां हैं। बिना किसी दस्तावेजी सबूत के सभी मराठाओं को कुनबी घोषित करना भविष्य में बड़ी कानूनी बाधाएं और ओबीसी (OBC) वर्ग की नाराजगी पैदा कर सकता है।

आंदोलन का बढ़ता प्रभाव मनोज जरांगे ने अब अपना रुख और सख्त कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे चिकित्सा उपचार और सलाइन भी बंद कर देंगे। 2023 में अंतरवाली सराटी में पुलिस लाठीचार्ज के बाद से मनोज जरांगे मराठा आरक्षण के निर्विवाद चेहरे बन चुके हैं। यह उनका 11वां अनशन है, जिसने राज्य की राजनीति में गहरा गतिरोध पैदा कर दिया है।

आगे क्या? जरांगे का काफिला जालना से बीड, अहिल्यानगर और पुणे होते हुए मुंबई की ओर अग्रसर है। 19 सितंबर को आजाद मैदान में प्रस्तावित अनशन को लेकर अब सबकी निगाहें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। फिलहाल, यह आंदोलन महाराष्ट्र की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ी परीक्षा बना हुआ है।

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