समान नागरिक संहिता (UCC) एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू करने का बड़ा ऐलान किया है। बीजेपी के लिए यह उसके वैचारिक एजेंडे की धुरी है, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने की राह में गठबंधन सहयोगियों की सावधानी एक बड़ा रोड़ा बन सकती है।
समान नागरिक संहिता का अर्थ है देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानून। वर्तमान में ये मामले अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ से संचालित होते हैं। बीजेपी इसे समानता और लैंगिक न्याय का आधार मानती है, जबकि आलोचक इसे भारत की विविधता के लिए चुनौती बताते हैं।
शाह का बयान बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के बाद UCC पार्टी का अगला बड़ा वैचारिक पड़ाव है। हालांकि, तकनीकी तौर पर UCC को लागू करना राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय है। यही कारण है कि हर राज्य की विधानसभा में इसे पारित कराना एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती होगी।
एनडीए के प्रमुख सहयोगी दलों—टीडीपी, जेडीयू और एलजेपी (रामविलास)—का रुख फिलहाल बीजेपी से अलग और सतर्क है। ये दल इसे सीधे खारिज तो नहीं कर रहे, लेकिन हर मंच से व्यापक चर्चा और सहमति का राग अलाप रहे हैं।
फिलहाल सहयोगी दलों का रुख बिना ड्राफ्ट देखे समर्थन नहीं वाला है। बीजेपी की असली परीक्षा केवल कानून बनाने की नहीं, बल्कि अपने सहयोगियों को यह भरोसा दिलाने की है कि यह ड्राफ्ट उनके पारंपरिक वोट बैंक को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
कुल मिलाकर, अमित शाह का 2029 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी तो है, लेकिन इसकी सफलता बीजेपी के एकला चलो रे और सहयोगियों के सबको साथ लेकर चलो के बीच संतुलन पर टिकी है। क्या बीजेपी ऐसा मॉडल तैयार कर पाएगी जो देश की विविधता को आहत किए बिना स्वीकार्य हो? यही आने वाले समय का सबसे बड़ा सवाल है।
#WATCH | On Union Home Minister Amit Shah saying UCC in all 21 NDA states before 2029, Congress MP Pramod Tiwari says, ... JD(U) s ideology on UCC has remained very clear, and this is the reason voices of rebellion are emerging in Bihar. Ram Vilas Paswan s party has even said… pic.twitter.com/rbXq08Gjmr
— ANI (@ANI) September 15, 2026
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