ईरान की पहाड़ियों में मौत को मात: 20 सेकंड का वह खौफनाक रेस्क्यू जो अब दुनिया के सामने है
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ईरान के आसमान में अप्रैल में एक अमेरिकी फाइटर जेट गिरा था। घटना के बाद दो वायुसेना अधिकारी अल्फा और ब्रावो दुश्मन के इलाके में अलग-अलग जगहों पर जा गिरे। अब डिक्लासिफाइड हुए वीडियो और जानकारी ने इस बेहद जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन की खौफनाक सच्चाई सामने ला दी है।

21 विमानों का काफिला और अल्फा का मिशन

इस्फहान के दक्षिण में पहाड़ी इलाके में गिरे अल्फा को बचाने के लिए अमेरिका ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। दिन के उजाले में दुश्मन के इलाके में घुसना जानलेवा हो सकता था, लेकिन सेना ने जोखिम उठाया। अल्फा को सुरक्षित निकालने के लिए एक साथ 21 अमेरिकी विमानों को मिशन पर भेजा गया था। यह किसी युद्ध जैसी स्थिति से कम नहीं था।

टूटी पीठ, 7000 फीट की ऊंचाई और ब्रावो का धैर्य

ब्रावो की स्थिति और भी गंभीर थी। पैराशूट खराब होने के कारण वह जमीन पर काफी तेज रफ्तार से गिरे थे। उनकी पीठ टूट चुकी थी और वे बुरी तरह घायल थे। इसके बावजूद, ईरानी सुरक्षाबलों की पकड़ से बचने के लिए उन्होंने 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी रिज की चढ़ाई की। दो दिनों तक वे दुश्मन के इलाके में पूरी तरह अकेले, बिना किसी मदद के मौत से जूझते रहे।

20 सेकंड में हुआ असंभव रेस्क्यू

दो दिन की मशक्कत के बाद अमेरिकी एलीट पैरारेस्क्यू टीम को ब्रावो की लोकेशन मिली। डिक्लासिफाइड इंफ्रारेड फुटेज में साफ दिख रहा है कि कैसे दो कमांडो हेलीकॉप्टर से नीचे कूदते हैं। घायल एयरमैन को देखते ही दोनों जवान बिजली की गति से उनकी ओर बढ़ते हैं। वे ब्रावो को कंधे पर उठाते हैं और हेलीकॉप्टर तक पहुँचा देते हैं। इस पूरे ऑपरेशन में केवल 20 सेकंड का समय लगा।

चलो : रेस्क्यू का सबसे भावुक पल

जब दो दिन की तन्हाई और दर्द के बाद ब्रावो ने अपने बचावकर्ताओं को सामने देखा, तो वह पल बेहद भावुक था। उन्होंने बताया कि अपने साथियों को देखना उनकी जिंदगी के सबसे सुकून भरे लम्हों में से एक था। जब उनसे पूछा गया कि रेस्क्यू टीम को सामने देखते ही उन्होंने क्या कहा, तो ब्रावो का जवाब बहुत छोटा लेकिन इरादों से भरा था— लेट्स गो (चलो)।

इस ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किए गए हेलीकॉप्टर की पहचान अभी भी गोपनीय रखी गई है, जो इस मिशन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, दुश्मन के इलाके में दिन के उजाले में यह रेस्क्यू करना एक साहसी और रणनीतिक रूप से अत्यंत कठिन फैसला था।

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