सऊदी अरब पर हूतियों का खूनी प्रहार: मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहले कई शहर, इमरजेंसी अलर्ट घोषित
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मिडिल ईस्ट में तनाव का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही सीधे सऊदी अरब के मुख्य शहरों को निशाना बना रहे हैं। बीती रात दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशैत समेत कई शहरों पर हूतियों ने एक साथ बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमला किया।

हमले में भारी तबाही खमीस मुशैत में स्थित सैन्य एयरबेस को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में 13 लोग घायल हुए हैं। हूतियों की कार्रवाई में 7 रिहायशी मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, जबकि दर्जनों वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

कई शहरों में इमरजेंसी का ऐलान हमले की गंभीरता को देखते हुए सऊदी प्रशासन ने खमीस मुशैत, आभा, ताइफ, जेद्दा और जाजान समेत प्रमुख शहरों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि, सऊदी सुरक्षा बलों का कहना है कि वर्तमान खतरा टल गया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल हूतियों के इस हमले ने सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को भी प्रभावित किया है। फिलहाल सुरक्षा कारणों से इस पाइपलाइन को बंद करना पड़ा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी मरम्मत में 3 से 5 हफ्ते लग सकते हैं। यदि यह पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में 4 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

सऊदी का पलटवार: 54 हवाई हमले जवाब में सऊदी अरब ने यमन में हूती ठिकानों पर जोरदार पलटवार किया है। सऊदी वायुसेना के एफ-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों ने हूतियों के रडार सिस्टम, रनवे, विमान हैंगर और गोला-बारूद डिपो को तबाह कर दिया है। हूतियों का आरोप है कि पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब ने उनके कब्जे वाले इलाकों में 54 हवाई हमले किए हैं।

अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का रुख सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी एडमिरल ब्रैड कूपर के साथ मिलकर आपातकालीन बैठक की है। सऊदी अरब इस संघर्ष में अमेरिका से सैन्य मदद की मांग कर रहा है। हालांकि, अमेरिका फिलहाल खुफिया जानकारी साझा करने तक ही सीमित है। इस बीच, हूती विद्रोहियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे चेतावनी देते हुए इस संघर्ष से दूर रहने की सलाह दी है।

तनाव के इस दौर में अब मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है, जहां तेल की कीमतों से लेकर क्षेत्रीय शांति तक सब कुछ दांव पर लगा है।

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