केंद्र सरकार ने जल विवाद सुलझाने की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। दशकों से लंबित किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट को लेकर 6 राज्यों के बीच सहमति बन गई है। आज दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्री एक ऐतिहासिक MoU पर हस्ताक्षर करेंगे।
क्या है 15,000 करोड़ का यह प्रोजेक्ट? हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर बनने वाला किशाऊ बांध राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इसका 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि शेष 10 फीसदी राशि छह राज्य मिलकर वहन करेंगे।
एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध यह 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम होगा। टिहरी बांध के बाद यह एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बनने जा रहा है। इसमें 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण होगा, जिससे सालाना 1379 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की जाएगी।
बंटवारे का नया फॉर्मूला हिमाचल प्रदेश वित्तीय कारणों से अपना हिस्सा वहन करने में असमर्थ था, जिसके कारण यह प्रोजेक्ट सालों से अटका था। अब एक नया फॉर्मूला निकाला गया है—हिमाचल के हिस्से का खर्च दिल्ली और राजस्थान उठाएंगे, जिसके बदले हिमाचल उन्हें पानी उपलब्ध कराएगा। हिमाचल को इस प्रोजेक्ट से 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी, जिससे राज्य को सालाना करीब 600 करोड़ रुपये की आय होगी।
सिंचाई और पेयजल संकट का समाधान इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि उत्तर भारत में सूखे और पेयजल की समस्या को खत्म करना है। बांध बनने से 97,000 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। साथ ही, यह ऊपरी यमुना बेसिन में जल भंडारण को बढ़ाएगा और यमुना नदी में स्वच्छ पानी का प्रवाह सुनिश्चित करेगा।
चुनौतियां और पुनर्वास विकास की इस राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। इस परियोजना के दायरे में हिमाचल के 8 और उत्तराखंड के 9 गांव आएंगे। लगभग 2950 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में जाएगी, जिसके कारण उत्तराखंड के 5500 और हिमाचल के 2092 लोगों का पुनर्वास करना होगा।
2008 से अटका था प्रोजेक्ट किशाऊ डैम को 2008 में नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया गया था, लेकिन राज्यों के बीच पानी के बंटवारे और खर्च को लेकर बनी खींचतान ने इसे फाइलों में कैद कर रखा था। 2026 में केंद्र सरकार की सक्रियता ने इस गतिरोध को खत्म कर दिया है। सरकार इससे पहले सोन नदी और नर्मदा जल विवाद जैसे जटिल मुद्दों को भी सुलझा चुकी है, अब किशाऊ डैम उत्तर भारत की जल सुरक्षा के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा।
#WATCH | A significant breakthrough was achieved today regarding the long-pending Kishau Multipurpose Dam Project, as consensus was reached among the concerned states during a high-level meeting chaired by Union Home and Cooperation Minister Amit Shah in New Delhi.
— ANI (@ANI) June 16, 2026
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