UCC पर बिहार का सियासी पारा गर्म: नीतीश की चुप्पी और NDA में खींचतान
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पटना: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने 2029 से पहले एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का दावा किया है। इस घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चर्चा बिहार में है, जहां सत्ताधारी एनडीए के भीतर ही इसे लेकर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं।

नीतीश के आवास पर मंथन मंगलवार को बिहार में राजनीतिक गहमागहमी उस वक्त बढ़ गई, जब जदयू के बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की। बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी मौजूद थे। हालांकि इस बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि अमित शाह के UCC वाले बयान के बाद पार्टी की रणनीति पर चर्चा ही इसका मुख्य कारण है।

जदयू का पुराना स्टैंड बनाम मौजूदा स्थिति जदयू सैद्धांतिक रूप से लंबे समय से UCC के खिलाफ रही है। 2017 में नीतीश कुमार ने विधि आयोग को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा था कि आम सहमति के बिना इसे जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, अभी तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर कोई नया आधिकारिक बयान नहीं दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का कहना है कि वे इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट करेंगे।

NDA में मतभेद के संकेत बिहार एनडीए के अन्य घटक दलों में भी एक राय नहीं दिख रही है। जहां जीतन राम मांझी की पार्टी हम इसके समर्थन में नजर आ रही है, वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा और चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने कहा है कि वे कानून का मसौदा देखने के बाद ही अपना रुख तय करेंगे।

बिहार के भीतर विरोध के बोल जदयू के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जदयू बिहार में इसे लागू नहीं होने देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार का स्टैंड शुरू से ही स्पष्ट रहा है।

2029 का लक्ष्य और अमित शाह का दावा अमित शाह ने रविवार को मुंबई में स्पष्ट किया था कि भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू कर दिया जाएगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नीतीश कुमार गठबंधन धर्म निभाते हुए इस पर अपना रुख बदलेंगे, या फिर वे अपने पुराने स्टैंड पर कायम रहते हुए एनडीए के सामने एक नई चुनौती पेश करेंगे। फिलहाल, जदयू के संयमित रुख ने बिहार की सियासत को पेचीदा बना दिया है।

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