दिशा सालियान केस: FIR में गैंगरेप-हत्या के गंभीर आरोप, क्या अब खुलेगा सुशांत मामले का भी सीक्रेट ?
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दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के चार साल बाद इस मामले ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। सीबीआई द्वारा दर्ज की गई नई एफआईआर ने बॉलीवुड और महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस एफआईआर में केवल मौत की जांच ही नहीं, बल्कि गैंगरेप और हत्या जैसे गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं।

एफआईआर में 21 लोगों की लंबी फेहरिस्त सीबीआई की इस एफआईआर में दिशा के पिता सतीश सालियान द्वारा लगाए गए आरोपों को आधार बनाया गया है। इसमें कुल 21 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, डिनो मोरिया, सूरज पांचोली, रिया चक्रवर्ती और शोविक चक्रवर्ती जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। इसके अलावा, तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख, पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह और सचिन वाजे का नाम भी जांच के दायरे में है।

जांच की सुई अधिकारी और फॉरेंसिक टीम पर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एफआईआर में डीसीपी विशाल ठाकुर, मालवणी पुलिस के अधिकारी, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और फॉरेंसिक लैब के स्टाफ को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि जांच प्रक्रिया के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की गई और साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश की गई।

क्या सचिन वाजे बनेंगे केस के मास्टर-की? इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा सचिन वाजे को लेकर हो रहा है। दिशा के पिता के वकील का दावा है कि उनके पास वाजे का एक कथित कंफेशन है। अगर वाजे सीबीआई के सामने सरकारी गवाह बनते हैं, तो यह केस पूरी तरह पलट सकता है। उनकी गवाही को कॉल रिकॉर्ड्स, टावर लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज से क्रॉस-चेक किया जाएगा, जो जांच को नई दिशा देगा।

दिशा का फोन: सबूतों को मिटाने का खेल? एफआईआर में दिशा सालियान के मोबाइल फोन को लेकर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। आरोप है कि यह फोन आदित्य ठाकरे और सचिन वाजे के पास था। दिशा के पिता का आरोप है कि फोन से जुड़ी जानकारियों को जानबूझकर मिटाया गया ताकि यह पता न चल सके कि मौत से पहले दिशा ने किन लोगों से बात की थी और किन लोगों का उन पर दबाव था।

सुशांत केस पर फिर उठने लगे सवाल दिशा केस की इस नई एफआईआर ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, मार्च 2025 में सीबीआई ने सुशांत केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन दिशा मामले में आए इस नए मोड़ ने दोनों के बीच के कथित कनेक्शन को लेकर फिर से अटकलें तेज कर दी हैं।

कानूनी स्थिति और आगे की राह यह स्पष्ट करना जरूरी है कि एफआईआर में नाम आने मात्र से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी पहले ही स्पष्ट किया है कि जांच के निष्कर्ष ही अंतिम सत्य तय करेंगे। अब सबकी निगाहें सीबीआई की जांच पर टिकी हैं कि क्या वे दिशा के फोन से उन राज़ों को बाहर निकाल पाएंगे, जो सालों से दबे हुए थे। क्या यह जांच सुशांत केस के उन अनसुलझे पन्नों को भी पलटेगी, जिनका जवाब देश वर्षों से मांग रहा है?

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