कानपुर: सोमवार की शाम शहर के आसमान में एक दुर्लभ और खूबसूरत खगोलीय नजारा देखने को मिला। सूर्यास्त के ठीक बाद पश्चिमी आकाश में अर्धचंद्राकार चांद और चमकीला शुक्र ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आए। साफ आसमान के कारण यह दृश्य शहर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
क्या था यह नजारा? शाम ढलते ही जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ा, पतला अर्धचंद्राकार चांद धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगा। उसी के ठीक बगल में एक चमकदार बिंदु दिखाई दिया, जो शुक्र ग्रह था। पहली नजर में इसे आम लोगों ने कोई चमकता सितारा समझा, लेकिन यह सौर मंडल का सबसे चमकीला ग्रह शुक्र था।
खगोलीय घटना का विज्ञान खगोल विज्ञान की भाषा में इस घटना को संयोजन (Conjunction) कहा जाता है। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि चांद और शुक्र अंतरिक्ष में एक-दूसरे के करीब आ गए हैं। पृथ्वी से देखने पर उनकी दिशा ऐसी होती है कि वे एक-दूसरे के समीप दिखाई देते हैं, जबकि असल में दोनों के बीच लाखों किलोमीटर की विशाल दूरी होती है।
सांझ का तारा क्यों है शुक्र? शुक्र ग्रह अक्सर सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में बहुत तेज रोशनी के साथ चमकता हुआ दिखाई देता है। इसी कारण इसे बोलचाल की भाषा में सांझ का तारा (Evening Star) कहा जाता है, हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह कोई तारा नहीं, बल्कि पृथ्वी के पड़ोसी ग्रहों में से एक है।
आम लोगों के लिए खास मौका कानपुर के निवासियों ने इस खूबसूरत नजारे को अपनी छतों और खुले मैदानों से निहारा। कई लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में इस खगोलीय जुगलबंदी को कैद भी किया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं पूरी तरह प्राकृतिक हैं और इन्हें देखने के लिए किसी विशेष दूरबीन या उपकरण की जरूरत नहीं होती; इन्हें नग्न आंखों से आसानी से देखा जा सकता है।
पृथ्वी के घूर्णन के कारण कुछ समय तक यह नजारा आसमान में दिखाई दिया और फिर धीरे-धीरे क्षितिज के नीचे ओझल हो गया। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह शाम बेहद यादगार रही।
*#WATCH कानपुर, उत्तर प्रदेश: शाम के समय आसमान में एक शानदार खगोलीय नजारा देखने को मिला जब सूरज डूबने के ठीक बाद पतली अर्धचंद्राकार चांद और शुक्र ग्रह एक-दूसरे के करीब दिखाई दिए। pic.twitter.com/JKgmP8V4tX
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 14, 2026
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